भैंसाझार मुआवजा घोटाले के मामले में राज्य सरकार ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की है। कोटा के तत्कालीन एसडीएम और बिलासपुर में आरटीओ के पद पर पदस्थ राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आनंद रूप तिवारी को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले में तत्कालीन कलेक्टर सौरभ कुमार के आदेश पर 6 सदस्यीय टीम ने जांच की थी। इसमें राजस्व और सिंचाई विभाग के 11 अधिकारी- कर्मचारियों को दोषी माना गया था। इससे पहले सकरी के पूर्व पटवारी को सस्पेंड और आरआई को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। मामले का खुलासा होने के 4 साल के भीतर यह तीसरी कार्रवाई है। अभी 8 अफसरों व कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी बाकी है, क्योंकि जांच रिपोर्ट में इनके भी नाम शामिल थे। मुआवजे में गड़बड़ी के चलते राज्य सरकार को 3.42 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।तत्कालीन राजस्व मंत्री ने एक प्रश्न के जवाब में विधानसभा में गड़बड़ी स्वीकार करते हुए कहा था कि दोषियों पर कार्रवाई के साथ वसूली होगी।
कमिश्नर कार्यालय में किए गए अटैच
सामान्य प्रशासन विभाग की अवर सचिव द्वारा मंगलवार को जारी किए निलंबन आदेश के तहत तिवारी को अरपा भैंसाझार चकरभाठा वितरक नहर के भू अर्जन की कार्यवाही में अनियमितता का दोषी माना गया है। उन्हें बिलासपुर के संभागायुक्त कार्यालय में अटैच किया गया है।


