राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में स्टाम्प विक्रेताओं द्वारा विक्रय किए जाने वाले ई-स्टाम्प के साथ राज-स्टाम्प प्रारम्भ करने की घोषणा की थी। एक वर्ष बीतने के बावजूद राज स्टांप योजना लागू नहीं हो पाई है। सरकार ने एक निजी कम्पनी काे ई-स्टांप के विक्रय के लिए नियुक्त किया हुआ है। प्रदेश में प्रतिदिन 20 कराेड़ रुपए के ई-स्टाॅम्प की बिक्री हाेती है। इसके लिए कंपनी इस राशि काे 3 से 4 दिन बाद सरकार के खाते में जमा करवाकर बैंक से ब्याज कमाती है। इससे सरकार काे सालाना 30 से 40 कराेड़ रुपए ब्याज का नुकसान हाेता है। साथ ही सालाना करीब 200 कराेड़ रुपए का कमीशन देना पड़ता है। राज-स्टाम्प की योजना को लागू किया जाता तो लगभग 20 करोड़ रुपए प्रतिदिन स्टांप कलेक्शन की राशि सीधे सरकार के खाते में जमा होगी। साथ ही सालाना 200 कराेड़ रुपए कमीशन की बचत हाेगी। फायदा; कमीशन खाेरी रुकेगी, पारदर्शिता आएगी राज-स्टाम्प का उद्देश्य स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना था। राज-स्टाम्प ऑनलाइन विक्रय के लिए पूर्णरूप से ऑनलाइन साइट को तैयार कर लिया, लेकिन शुरू नहीं किया। राज-स्टाम्प लागू हाेने से कमीशन खाेरी बंद हाेने से आमजन काे राहत मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में इस योजना के क्रियान्वयन में देरी के कारण, संपत्ति खरीदने और बेचने वाले लोगों को पारंपरिक और जटिल प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है। यदि राज-स्टाम्प लागू हो जाता तो सरकार काे सीधा राजस्व मिलता और प्राइवेट कंपनी काे दिया जा रहा सालाना करीब 200 कराेड़ रुपए का शुल्क नहीं देना पड़ता।


