बृजमोहन शर्मा| अलवर शहर में नगर निगम की ओर से संचालित रैन बसेरों के हालात सही नहीं हैं। इन रैन बसेरों में कहीं गद्दे साफ नहीं तो कहीं गद॰दों पर कवर भी नहीं है। रेलवे स्टेशन स्थित रैन बसेरे में तो बेड की संख्या भी कम है। हालात यह हो जाते हैं कि एक बेड़ पर दो लोग सोकर रात गुजार रहे हैं। भास्कर संवाददाता ने रविवार को रैन बसेरों के हालात जानने के लिए दौरा किया तो कई बड़ी खामियां सामने आईं। शहर में पड़ रही कड़ाके की सर्दी के बीच रैन बसेरों में लोगों को सोने के लिए गंदे बिस्तर मिलने से उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। यहां मोबाइल या मजदूरी के एवज में मिली राशि की चोरी का खतरा हर समय बना रहता है। रैन बसेरों में शरण लेने वालों का यह भी कहना था कि होमगार्ड या पुलिस के जवान यहां भी तैनात किए जाएं तो उनकी समस्या कम हो सकती है। .केडलगंज रैन बसेरा रात 10.45 बजे रैनबसेरे का गेट तो खुला हुआ है और यहां 20 बैड पर 17 लोग ठहरे हुए हैं। दूसरी मंजिल पर बने रैन बसेरे में गद्दे व इनके कवर नहीं थे। गार्ड ने बताया हमने इस मामले में शिकायत की हुई है। . रात 11.25 बजे पुराना सूचना केंद्र यहां भी रैन बसेरे में पुरुषों के 20 बैड हैं। 18 पर लोगों को जगह मिली हुई है। दो खाली हैं। गंदे गद्दों व रजाई की समस्या यहां भी नजर आई। ^अधिकारियों को व्यवस्था के लिए कहा है रैन बसेरों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए अधिकारियों से कहा है। मैंने खुद भी दौरा कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली है। साथ ही कड़ाके की सर्दी से लोगों को बचाने की व्यवस्था करने लिए कहा है। -जितेंद्र सिंह नरूका, आयुक्त नगर निगम। . रविवार रात 10 बजे रेलवे स्टेशन रैन बसेरा : यहां राजगढ़ का कजोड़ आकर सोने के लिए बेड की मांग करता है। रैन बसेरे का गार्ड बताता है कि सभी 42 बेड फुल हो गए। कोई जान पहचान का हो और वह आपको साथ सोने दे तो जगह देख लो। कजोड़ बोला कि उसके पास मजदूरी के कुछ पैसे हैं साथ ही मोबाइल भी है। इसलिए कजोड़ वहां से चला जाता है। गार्ड का कहना था हम जमीन पर सोने के लिए जगह नहीं दे सकते हैं।


