राजा भोज एयरपोर्ट पर रोजाना रात में रनवे से रबर हटाने का काम चल रहा है। यह काम यहां हर दो महीने में करना पड़ता है। वजह…उड़ानों की लैंडिंग सुरक्षित हो। हर दो महीने में रनवे पर करीब 10 से 12 किलो तक रबर जम जाती है। इसे साफ नहीं किया जाए तो विमानों के फिसलने का खतरा रहता है। दरअसल, जिस वक्त विमान रनवे पर लैंड करता है, उस वक्त उसकी रफ्तार 230 से 260 किमी प्रति घंटा तक होती है। विमान इस रफ्तार से रनवे पर लैंड करता है, तो उसके टायर अत्यधिक गर्म हो जाते हैं और टचडाउन के समय टायर की सतह का कुछ हिस्सा पिघलकर रनवे पर चिपक जाता है। लगातार लैंडिंग के चलते यही रबर धीरे-धीरे परत के रूप में जमा होने लगता है। हाई प्रेशर वाटर जेट तकनीक का इस्तेमाल
रनवे से रबर हटाने का काम विशेष मशीनों और हाई-प्रेशर वाटर जेट तकनीक से किया जाता है, ताकि सतह को नुकसान पहुंचाए बिना उसकी पकड़ दोबारा बहाल की जा सके। फ्लाइट्स के संचालन पर असर न पड़े, इसलिए यह पूरा कार्य रात के समय कराया जाता है। फ्रिक्शन स्तर 0.75 रखना जरूरी… राजा भोज एयरपोर्ट के निदेशक रामजी अवस्थी ने बताया कि भोपाल एयरपोर्ट पर भले ही उड़ानों की संख्या सीमित हो, लेकिन इसके बावजूद रनवे का फ्रिक्शन स्तर 0.75 तक बनाए रखा जाता है। यह घर्षण स्तर तेज रफ्तार विमान को सुरक्षित रूप से तय दूरी में रोकने के लिए जरूरी माना जाता है। बारिश में ये रबर और भी खतरनाक
अधिकारियों के मुताबिक, बारिश के मौसम में रनवे पर जमी रबर की परत और भी खतरनाक साबित हो सकती है। पानी पड़ते ही फिसलन बढ़ जाती है, जिससे स्किडिंग और ब्रेकिंग दूरी बढ़ने का जोखिम रहता है। यही कारण है कि डीजीसीए और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा रनवे की नियमित जांच और सफाई को अनिवार्य किया गया है।


