दो महीने पहले भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से 337 मीट्रिक टन कचरा पीथमपुर स्थित रामकी एनवायरो फैक्ट्री तक कंटेनरों में भरकर पहुंचाया गया था। लेकिन, कचरे के अनलोड होने से पहले ही स्थानीय लोगों ने विरोध तेज कर दिया। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने 27 फरवरी से 10 मीट्रिक टन कचरे के डिस्पोजल का ट्रायल शुरू करने का निर्देश दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस ट्रायल पर रोक लगाते हुए सरकार को याचिकाकर्ता की आशंकाओं पर सुनवाई का समय दिया है। इस मुद्दे को लेकर भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में शामिल हुए रामकी ग्रुप के चेयरमैन अल्ला अयोध्या रामी रेड्डी से दैनिक भास्कर ने चर्चा की। सवाल: यूनियन कार्बाइड के कचरे के डिस्पोजल का काम आपकी कंपनी को मिला, लेकिन विवाद के चलते कंटेनर भरे के भरे रह गए हैं? जवाब: यह दुर्भाग्यपूर्ण हादसा 40 साल पहले हुआ था। यह देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला है। हादसे के 40 साल बाद भी हम इसे पूरी तरह साफ नहीं कर पाए हैं, यह नहीं होना चाहिए। इस देश में क्षमता है अगर किसी की भी गलती हुई तो उसे निपटाने के लिए इस सरकार और देश के पास क्षमता है। हम जितनी भी कठिनाई हो हम उसे अच्छे ढंग से जल्दी से जल्दी क्लियर कर देंगे। सवाल: जनता के बीच जो गलतफहमी पैदा हुई, उसके लिए आप किसे जिम्मेदार मानते हैं? जवाब: पब्लिक की सोच, डर बिल्कुल गलत नहीं हैं। पिछले 10-15 साल से यह मामला चल रहा है। पहले भी पायलट स्केल पर डिस्पोजल किया गया था। जो कचरा पहले पड़ा था, उसे अच्छी तरह से पैक किया गया था। हमारी कंपनी ने इसे पूरी समझदारी से हैंडल किया है। पिछले 40 सालों में भारत एन्वॉयरमेंट सेक्टर के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है। सवाल- जो कंटेनर भरे हुए खड़े हैं, उस वजह से आपको आर्थिक नुकसान हुआ?
जवाब- ये सब होता रहता है, मुझे लगता है कि सरकार इसे भी देख लेगी। सवाल- पीथमपुर के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है? जवाब- कोई डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हमारे लोग तो पिछले 40 दिनों से उसी साइट पर ही हैं। उधर ही सोते हैं। अच्छी तरह से जो प्लानिंग और एसओपी है, उसी के ग्लोबल स्टेंडर्ड के तहत ये डिस्पोजल किया जाएगा। सवाल- रामकी ग्रुप कहां कितना निवेश करने जा रहा है? जवाब- प्रधानमंत्री ने जो विकसित भारत बनाने का जो डायरेक्शन देश को दिया है। उसके लिए मप्र सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव आगे लेकर जा रहे हैं। इस समय पर ये इन्वेस्टर्स समिट बहुत महत्वपूर्ण है। अर्बन डेवलपमेंट, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, रिन्युएबल एनर्जी, एन्वॉयरमेंट के क्षेत्र में क्या इन्वेस्टमेंट करना है, उसके लिए एक प्लान बनाया है। उस प्लान को इम्प्लीमेंट करने के लिए कुछ इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं। सवाल- आप मप्र के किस क्षेत्र में निवेश करने जा रहे हैं?
जवाब- अभी अर्बन एरिया में वॉटर, सीवेज और दूसरे सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर में कहां क्या निवेश करना है। उसके लिए सरकार के साथ बैठकर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के मॉडल से करीब 400 से 500 करोड़ निवेश करना चाहते हैं। इंडस्ट्रीज में औद्योगिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को कैसे बढ़ाना है। मौजूदा उद्योगों के ऑन गोइंग प्रोजेक्ट में सिविल इन्फ्रास्ट्रक्चर, एन्वॉयरमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर को हमें और बढ़ाकर ग्लोबल स्टेंडर्ड पर लेकर आना है। उसके लिए हमने कुछ इन्वेस्टमेंट प्लान किया है। नया इंडस्ट्रियल पार्क लगाने के लिए भी हमारी कोशिश जारी है।


