छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी CM टीएस सिंहदेव ने हसदेव क्षेत्र में प्रस्तावित केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। सिंहदेव ने कहा कि कोल ब्लॉक को मंजूरी दिलाने के लिए गलत NOC तैयार की गई है। DFO अभिषेक जोगावत की गलत रिपोर्ट के आधार पर BJP सरकार नए खदान को मंजूरी देने जा रही है। सिंहदेव ने बताया कि DFO ने वन डायवर्सन के लिए दी गई सहमति में भी सीताबेंगरा तक की दूरी 11 किलोमीटर बताई है। खदान की सीमा के नजदीकी छोर के बजाय दूसरे नजदीकी छोर से यह दूरी नापी गई है। केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक की सीमा से रामगढ़ पहाड़ की दूरी 8.1 किलोमीटर, जोगीमाड़ा की दूरी 9.3 किलोमीटर है। सिंहदेव ने कहा कि यह कोल ब्लॉक सिर्फ एक उद्योगपति को फायदा पहुंचाने के लिए हड़बड़ी में खोला जा रहा है। यह कोयला खदान नहीं खुलेगा तो किसी को कोई भी नुकसान नहीं होगा। लेकिन खोला गया तो रामगढ़ पहाड़ का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। हम आने वाली पीढ़ी के लिए इस विरासत को खो देंगे। सिंहदेव ने कहा कि भूपेश सरकार के समय भी तत्कालीन कलेक्टर संजीव झा ने रामगढ़ के श्रीराम मंदिर की वास्तविक दूरी को दरकिनार कर 2 किलोमीटर आगे सीताबेंगरा से रिपोर्ट बनाई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर परसा कोल ब्लॉक को मंजूरी मिली थी, तब भी स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था। अब केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को लेकर वही कहानी दोहराई जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों ने ग्रामसभाओं को फर्जी बताया सिंहदेव ने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों ने ग्रामसभाओं को फर्जी बताया है। 2020 में तत्कालीन सरगुजा कलेक्टर ने PKEB खदान की दूरी सीताबेंगरा से 11 किलोमीटर बताई थी, जबकि रिपोर्ट में रामगढ़ के ऐतिहासिक राममंदिर (जोगीमाड़ा) और रामगढ़ पहाड़ की दूरी नहीं बताई गई थी। पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा कि प्रशासन ने रामगढ़ पहाड़ के नीचे नये राममंदिर का निर्माण शुरू कराया है। इसमें कुछ जनप्रतिनिधियों को आगे किया गया है। कोल ब्लॉक में हो रही ब्लास्टिंग से रामगढ़ की पहाड़ियों में पत्थरों में दरारें आ गई हैं। सड़क पर लैंड स्लाइड हो रही है। वनविभाग ने चेतावनी के बोर्ड लगाए हैं। पूर्व की सरकार ने रोकी थी अनुमति सिंहदेव ने कहा कि पूर्ववर्ती भूपेश सरकार में लेमरू एलिफेंट प्रोजेक्ट का एरिया बढ़ाकर 1995 वर्ग किलोमीटर किया गया है। पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में केते एक्सटेंशन खदान से लेमरू प्रोजेक्ट की दूरी 10 किलोमीटर से कम बताई गई थी, इस कारण यह अनुमति रोकी गई थी। सिंहदेव ने कहा कि इस कोयला खदान में सिर्फ 16.44 हेक्टेयर भूमि ही गैर वनभूमि है। शेष घने जंगल हैं। यहां 4.5 लाख से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे जो भविष्य में छत्तीसगढ़ के पर्यावरण के लिए अत्यधिक खतरनाक होगा। लोगों को रोकने के लिए नया राममंदिर बनाया जा रहा सिंहदेव ने कहा कि नया राम मंदिर इसलिए भी बनाया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में रामगढ़ की पहाड़ी पर लोगों को जाने से रोका जा सके। केते एक्सटेंशन को मंजूरी दी गई तो रामगढ़ का बर्बाद होना तय है। प्रेसवार्ता के दौरान रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति के सदस्य सहित कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक, पूर्व अध्यक्ष राकेश गुप्ता एवं रामगढ़ क्षेत्र के लोग उपस्थित थे। रामगढ़ पहाड़ी और उनके महत्व बारे में जानिए उदयपुर विकासखंड मुख्यालय के समीप स्थित रामगढ़ पहाड़ी दूर से देखने पर मानो किसी विशाल हाथी की आकृति सी प्रतीत होती है। समुद्र तल से लगभग 3,202 फीट ऊंची यह पहाड़ी अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी अद्वितीय पहचान रखती है। महाकवि कालिदास की अमर कृति ‘मेघदूतम्’ की रचना-स्थली मानी जाने वाली इस पर्वत श्रृंखला की गोद में विश्व की सबसे प्राचीन शैल नाट्यशाला बसी है। इसकी महत्ता को जीवित रखने के लिए हर वर्ष आषाढ़ मास के पहले दिन यहां भव्य रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें कला, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। रामगढ़ पर्वत के निचले शिखर पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं भारतीय स्थापत्य और नाट्य कला की धरोहर हैं। इतिहासकार मानते हैं कि ये गुफाएं तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व, मौर्यकालीन युग की हैं और इन्हें विश्व की सबसे प्राचीन शैल नाट्यशालाओं के रूप में मान्यता प्राप्त है। गुफाओं के भीतर की संरचना इस बात की गवाही देती है कि यहां नाट्य और सांस्कृतिक आयोजनों की परंपरा प्राचीन काल से रही है। जोगीमारा गुफा अपने भित्ति चित्रों और मौर्यकालीन ब्राह्मी लिपि में लिखित अभिलेखों के लिए प्रसिद्ध है। वहीं, सीताबेंगरा गुफा में गुप्तकालीन ब्राह्मी लिपि के अभिलेख पाए जाते हैं, जो भारतीय इतिहास और साहित्य को अमूल्य प्रमाण उपलब्ध कराते हैं। इन शिलालेखों और चित्रों की वजह से रामगढ़ न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि संपूर्ण भारत की सांस्कृतिक अस्मिता का जीवंत प्रतीक माना जाता है। पुरातात्विक दस्तावेजों के रूप में मूर्तियों, शिलालेखों और ताम्रपत्रों का बड़ा महत्व है। रामगढ़ में ऐसे महत्व की वस्तुएं उपलब्ध है। जोगीमारा गुफा में लगभग आठ मूर्तियां संग्रहित हैं। इन मूर्तियों का आकार, प्रकार और ऊंचाई के साथ आकृतियों के उत्कीर्ण करने की शैली से स्पष्ट होता है कि ये मूर्तियां राजपूत शैली में निर्मित की गई हैं। इस शैली में चेहरे का उभार, लंबी नाक, पतला कमर, नितम्बों का आकार, जांघों और पिंडलियों का विशेष उभार, और अर्द्धकोणाकार पंजे प्रमुख होते हैं। हालांकि, मूर्तियों के मुखमंडल पर चिंतन की मुद्रा राजपूत शैली से थोड़ी अलग भाव भंगिमा दर्शाती है। इन सभी तथ्यों के आधार पर अनुमान लगाया जाता है कि ये मूर्तियां लगभग 2,000 वर्ष पुरानी हैं। ……………………………………… इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें रामगढ़ पहाड़ को बचाने रामगढ़ संरक्षण और संवर्धन समिति:टीएस सिंहदेव बोले-नए कोल ब्लॉक से रामगढ़ का अस्तित्व खतरे में,ब्लास्टिंग से आ रही हैं दरारें हसदेव क्षेत्र में नए कोल प्रोजेक्ट के कारण सरगुजा की सांस्कृतिक धरोहर रामगढ़ पर्वत पर संभावित खतरे को देखते पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव की पहल पर रामगढ़ संरक्षण और संवर्द्धन समिति नाम के गैर राजनीतिक संस्था का गठन किया गया है। टीएस सिंहदेव ने कहा कि केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक से रामगढ़ के अस्तित्व को खतरा है। पढ़ें पूरी खबर…


