रामप्रसाद महाराज के सन्यासी जीवन के 50 साल पूरे:28 अप्रैल 9 दिवसीय नवधा भक्ति महोत्सव का होगा आयोजन; देशभर से आएंगे साधु-संत

सूरसागर बड़ा रामद्वारा के गादीपति रामप्रसाद महाराज के विरक्त संत वेश धारण करने के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 28 अप्रैल वे 9 दिवसीय नवधा भक्ति महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसमें देशभर से रामस्नेही संप्रदाय से जुड़े साधु-संत शिरकत करेंगे। इस दौरान विशेष 56 भोग बनाने के लिए वृंदावन के रसिक जोधपुर आएंगे। बुधवार को बालव्यास राधाकृष्ण महाराज व संत रामप्रसाद महाराज सहित अन्य संतों ने आयोजन के ब्रोशर का विमोचन किया। आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए बालव्यास राधाकृष्ण महाराज ने बताया – 28 अप्रैल से 6 मई तक आयोजित होने वाले श्री नवधा भक्ति महोत्सव के दौरान संत समागम, सत्संग, संकीर्तन, संत दर्शन और मनोरथ का महासंगम होगा। महोत्सव में अनूठे धार्मिक आयोजन सहित नौका विहार, 56 भोग, प्रतिदिन संत वाणी, दमोह मध्यप्रदेश की मंडली की ओर से हरिराम संकीर्तन व अन्य आयोजन होंगे। इंद्रेश महाराज व मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास के भी होंगे प्रवचन रामस्नेही संप्रदाय खेड़ापा पीठाचार्य श्री 1008 श्री पुरुषोत्तमदास महाराज के सानिध्य में होने वाले आयोजन में देश-विदेश में विख्यात कथावाचक इंद्रेश महाराज, मलूक पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज के साथ बालव्यास राधाकृष्ण भी कथा, नानी बाई का मायरा सहित अन्य प्रवचन करेंगे। 56 भोग के लिए वृदांवन से आएंगे रसिक, अनूठा होगा नौका विहार श्रीबड़ा रामद्वारा महोत्सव सेवा समिति की ओर से 1 मई को शाम 7:30 बजे से श्री राधा गोपाल प्रभू का अनूठा नौका विहार किया जाएगा। इसमें पत्तों सहित झांकी सजाते हुए नौका विहार दर्शन और श्रीराधा वृंदावन, यमुना तट की सुंदर झांकी सजाई जाएगी। इसी क्रम में 2 मई को बृज रसिक बाबा चित्र-विचित्र मंडली की ओर से भजन प्रस्तुतियां, 3 को शाम 7:30 बजे ठाकुरजी के संग भगवत प्राप्त दिवरू संत महापुरुषों को 56 भोग समर्पण किया जाएगा। 56 भोग बनाने के लिए विशेष रसिक वृदांवन से आएंगे और गिरिराजजी की तर्ज पर पवित्र तरीके से तैयार किए जाएंगे। 5 वर्ष की आयु में मिला संतों का सानिध्य, पिछले 9 वर्ष से गादीपति रामप्रसाद महाराज ने बताया कि 5 वर्ष की उम्र में भोपालगढ़ के छोटे से गांव बागोरिया में संत समागम में सिंथल पीठाधीश्वर भगवंतदास महाराज, खेड़ापा के महंत पुरुषोत्तमदास महाराज, अभयराम महाराज, मोहनदास महाराज सहित अनेक संत हिस्सा लेने आए। उस समय संतों की वाणी सुनकर वे प्रेरित हुए। परिवार के भी धर्म से जुड़े होने के साथ ही संतों का घर में आवागमन रहता था। जब पिता से रामद्वारा की इच्छा जाहिर की तो दादी और पिता के साथ रामद्वारा पहुंचे और दादा गुरु अभयराम महाराज के सान्निध्य में रहे। यहां रहकर ही सूरसागर स्थित प्राथमिक विद्यालय, दरबार संस्कृत कॉलेज, रामायण की ज्ञान सहित शिक्षा हासिल की। पिछले 9 वर्षों से संत रामप्रसाद महाराज सूरसागर बड़ा रामद्वारा के गादीपति की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

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