राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष रामविलास चौधरी ने कहा कि योजनाओं का नाम बदल देने से न तो मनरेगा योजना और मजबूत होगी और न ही मजदूरों की हालत सुधरेगी। सरकार को सिर्फ नाम बदलने की राजनीति आती है, लेकिन जमीन पर काम करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखती है। अच्छी बात तो यह होती कि विपक्ष से सुझाव लेकर इस योजना को और मजबूत करते। वे आज उदयपुर के आरटीडीसी होटल कजरी में मनरेगा (VB G RAMG) को लेकर प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार जनकल्याण की योजनाओं को मजबूत करने के बजाय केवल उनके नाम और स्वरूप बदलने की राजनीति कर रही है, जिससे आम जनता की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाया जा सके। ‘VB-G RAM G’ केवल नाम बदलना नहीं, बल्कि मनरेगा के मूल सिद्धांतों पर हमला है। मनरेगा एक कानूनी अधिकार था, जबकि नई योजना इसे केंद्र की इच्छा पर निर्भर बनाना चाहती है। चौधरी ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) जैसी ऐतिहासिक और जनहितकारी योजना को कांग्रेस सरकार ने सर्वसम्मति से लागू किया था। इस योजना ने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को सम्मानजनक रोजगार, आजीविका की सुरक्षा और आर्थिक संबल प्रदान किया लेकिन आज सरकार मनरेगा में बदलाव कर इसे जी-रामजी मॉडल के रूप में लागू करने का प्रयास कर रही है, जो मूल भावना के खिलाफ है। राज्यों पर वित्तीय बोझ पड़ेगा उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के तहत निर्णय लेने का अधिकार पूरी तरह केंद्र सरकार के हाथ में चला जाएगा, जिससे संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचेगा। इससे राज्यों के साथ भेदभाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और राज्यों पर चार गुना तक अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका है। चौधरी ने कहा कि यह मॉडल मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करेगा और मनरेगा को एक अधिकार आधारित योजना से महज एक नियंत्रित योजना में बदल देगा। इसी के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने देशभर में 45 दिन का देशव्यापी आंदोलन शुरू किया है, ताकि मजदूरों, किसानों और ग्रामीण जनता की आवाज़ को बुलंद किया जा सके। किसान लागत और कर्ज के बोझ से दबा हुआ है रामविलास चौधरी ने कहा कि देश और प्रदेश की जनता आज अभूतपूर्व महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असुरक्षा से जूझ रही है। युवा वर्ग को रोजगार नहीं मिल रहा है, किसान लागत और कर्ज के बोझ से दबा हुआ है और गरीब वर्ग की क्रय शक्ति लगातार घट रही है। इसके बावजूद सरकार इन मूल मुद्दों पर ठोस चर्चा करने के बजाय भावनात्मक और भटकाने वाले एजेंडे चला रही है। इस दौरान देहात जिलाध्यक्ष रघुवीर मीणा, शहर अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़, सांसद प्रत्याशी रहे ताराचंद मीणा, प्रदेश महासचिव पंकज कुमार शर्मा, पूर्व देहात जिला अध्यक्ष कचरूलाल चौधरी, पूर्व मंत्री मांगीलाल गरासिया, प्रवक्ता संजीव राजपुरोहित, पंकज पालीवाल, फिरोज अहमद शेख आदि उपस्थित रहे।


