चूरू के रामसरा गांव में भगाणा जोहड़ में नगर परिषद द्वारा शहर का गंदा पानी डालने के विरोध में ग्रामीणों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने इस संबंध में पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़ और जिला कलेक्टर अभिषेक सुराणा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि रामसरा गांव का भगाणा जोहड़ एनएच-52 के पास स्थित है। यह रामसरा, खांसोली और चूरू कस्बे के किसानों के लिए तथा आसपास के खेतों की सिंचाई के लिए एक प्रमुख पेयजल स्रोत है। यह जोहड़ गोचर भूमि पर है, जिसका उपयोग आसपास के मवेशियों के चरने के लिए भी किया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि नगर परिषद चूरू द्वारा इस जोहड़ में शहर का गंदा पानी डालकर गोचर और पेयजल स्रोत को प्रदूषित किया जा रहा है। पूरे दक्षिणी चूरू का गंदा पानी डालने के लिए जोहड़ में एक बड़ी लाइन डाली जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, 18-20 बीघा के इस जोहड़ की क्षमता इतनी नहीं है कि वह इतना गंदा पानी संभाल सके। उन्होंने बताया कि पहले भी यह गंदा पानी आसपास के खेतों की मेड़ तोड़कर फसलों को बर्बाद कर चुका है। गंदे पानी की बदबू के कारण आसपास के किसानों के लिए खेती करना मुश्किल हो गया है। इससे रामसरा के ग्रामीणों और आसपास की कॉलोनियों के लोगों का जीवन भी प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों ने नगर परिषद, जिला प्रशासन और जन प्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया है। उनकी मांग है कि गंदे पानी की लाइन को इस गोचर भूमि और जोहड़ से हटाकर किसी अन्य अनुपयोगी वन भूमि में डाला जाए। हालांकि, बजट घोषणा में डीपीआर बनने की बात कहकर वर्तमान में पूरे दक्षिणी चूरू के सीवरेज का गंदा पानी जोहड़ भूमि में डालने के लिए बड़ी लाइन डाली जा रही है। ओम कॉलोनी क्षेत्र में खुदाई का काम भी शुरू हो गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस काम को नहीं रोका गया, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान राजेंद्र राजपुरोहित, संपत शर्मा, कमल भांबू, गुमानीराम, पप्पू सिंह चौहान, नत्थू सिंह, बिहारीलाल, ओमप्रकाश प्रजापत, परमानंद, नरेंद्र सिहाग और राजेंद्र प्रजापत सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।


