महावीर जी अतिशय क्षेत्र में महिला जागृति संघ की ओर से आयोजित पंच-दिवसीय भव्य समारोह के अंतर्गत, शशि जैन द्वारा लिखित और राजेंद्र शर्मा ‘राजू’ की ओर से निर्देशित नाटक ‘सीता की अग्नि परीक्षा’ का अत्यंत सशक्त और भावपूर्ण मंचन किया गया। इस नाटक में रामायण की प्रमुख घटनाओं को बड़े ही सुंदर और संवेदनशील ढंग से दर्शाया गया। सीता का बचपन, राम से विवाह, भामण्डल भाई से मिलन, वनवास, हनुमान द्वारा लंका में संदेश देना, लंका विजय, अयोध्या वापसी, और अयोध्या वासियों के संदेह के कारण सीता का वन गमन इन सभी घटनाओं को गहराई से प्रस्तुत किया गया। नाटक में लव-कुश का जन्म, उनका बाल्यकाल, राम से युद्ध, नारद द्वारा सच उजागर करना, राम द्वारा सीता को बुलाना, और अंत में सीता की अग्नि परीक्षा को अत्यंत प्रभावशाली अभिनय और भावनाओं के साथ मंचित किया गया। राम की भूमिका में गरिमा जैन, सीता की भूमिका में प्रियांशी रानू, लक्ष्मण की भूमिका में सरिता गंगवाल ने अपने भावपूर्ण और सशक्त अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर तालियां बटोरीं। अन्य कलाकारों में शारदा सोनी, निर्मला गंगवाल, दीपिका जैन, अनिला जैन, प्रियांशी जैन, निर्मला बैद, मीरा पपड़ीवाला, रेनू जैन, सुनिला जैन, निधि जैन, मानसी जैन, सिद्ध जैन, मंजू जैन, रमा जैन, प्रेमलता, मैना, तारामणि, विजिया सोनी ने भी अपने-अपने पात्रों को बड़ी सहजता और संजीदगी से निभाकर दशकों से जुड़ी इस परंपरा को जीवंत रखा। बाल कलाकारों में प्रार्थना, रति, मेंहूं और योग्या ने अपनी मासूम अदाओं से दर्शकों का दिल जीत लिया।गायन में कुसुम ठोलिया, साधना काला और शशि जैन ने अपने मधुर स्वरों से प्रस्तुति को भावनात्मक ऊंचाई दी। नाटक की कमेंट्री रंगकर्मी मनोज स्वामी ने प्रभावशाली अंदाज में की। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन शारदा सोनी ने किया।


