छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला में एक मामला सामने आया है। जिसमें एकताल में रहने वाले झारा परिवार को तेलंगाना से वापस नहीं आने दिया जा रहा था। झारा परिवार ईंट भट्ठा में काम करने गए थे। इसी दौरान एक युवक की मौत हो जाने के बाद उसके शव को उसके गांव नहीं भेजा गया तब इसका खुलासा हुआ। जिसके बाद शव को वापस लाने के लिए प्रदेश के वित्तमंत्री व रायगढ़ विधायक के नाम आवेदन भी सौंपा गया। एकताल के झारा परिवार ढोकरा शिल्प का काम करते हैं, लेकिन उनके इस काम में कोई ज्यादा रिस्पांस नहीं मिल पाने के कारण अपना परिवार चलाने के लिए अब ईंट भट्ठो में मजदूरी कर रहे हैं। ऐसे में एकताल से करीब 100 से 150 लोगों का परिवार अलग अलग राज्यों व शहरों में जाकर ईंट भट्ठा में काम कर रहा है। वहीं बताया जा रहा है कि तेलंगाना में तकरीबन 50-60 लोग अपने परिवार के साथ ईंट भट्ठा में काम कर रहे होंगे। जहां करीब 3 माह पहले नवीन झारा भी अपनी पत्नी सुभाषिनी, बेटा आदित्य व अंकिता के साथ तेलांगाना के गरूडपेठ गांव में ईंट भट्ठे में काम करने गए थे। सोमवार को नवीन की किसी कारण से मौत हो गई। इसके बाद उसकी पत्नी ने एकताल में परिवार को जानकारी देते हुए ठेकेदार को शव रायगढ़ ले जाने की बात कही, लेकिन ईंट भट्ठे का ठेकेदार उन्हें जाने नहीं दिया। वित्तमंत्री को आवेदन सौंपा
जिससे परेशान होकर उसकी पत्नी ने ठेकेदार से कई बार रायगढ़ जाने के लिए गुहार लगाई और दूसरी ओर मृतक के परिवार ने एकताल के सरपंच को जानकारी देते हुए शव को रायगढ़ लाने के लिए मदद मांगी। जिसके बाद सरपंच ने भी प्रयास किया। बुधवार को एकताल गांव के सरपंच समेत कई झारा परिवार प्रदेश के वित्तमंत्री व रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी के कार्यालय पहुंचे। यहां उनके नाम से आवेदन सौंपा। जिसके बाद आगे की प्रक्रिया हुई और गुरूवार की सुबह शव एकताल आ गया। जिसके बाद उसके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। बड़ा भाई अभी वहीं फंसा
गांव के झारा परिवार के मुखिया धनीराम झारा ने बताया कि मृतक के परिवार में चार लोग हैं। कल शव एकताल लाया गया। गांव से करीब 50-60 लोग तेलंगाना ईंट भट्ठा में काम करने गए हुए हैं। मृतक का बड़ा भाई जुजेष्टी झारा अभी भी वहीं फंसा हुआ है और उसे नहीं आने दे रहे हैं। गांव के करीब 100 से 150 लोग अलग अलग राज्यों व शहरों में जाकर मजदूरी कर रहे हैं। प्रताड़ित करते हैं ठेकेदार
गांव के सरपंच हिमांशु चौहान ने बताया कि ये झारा परिवार ढोकरा शिल्प के कारीगर हैं और ईंट भट्ठा में जब काम करने जाते हैं तो उन्हें वह काम सही तरह से नहीं आता है। संभवतः इसी वजह से मजदूरों के साथ मारपीट करने के साथ ही उन्हें कई तरह से प्रताड़ित करते हैं। उनका कहना है कि प्रशासन से मदद मांगी जाएगी कि झारा परिवार को मनरेगा व अन्य कार्यों में काम दे। ताकि ये पलायन नहीं कर सके।
जिस भट्ठे में मौत हुई वहीं 8 झारा परिवार काम कर रहा
मृतक के नवीन झारा के भाई घेसरू झारा ने बताया कि वे गरीब परिवार से हैं। इसलिए रोजी रोटी की तलाश में नवीन झारा करीब 3 माह पहले तेलगांना गया था। वहां मौजूद ठेकेदार वहां काम करने वाले मजदूरों के साथ मारपीट करता है। जहां उसके भाई की मौत हुई है। वहीं उन्हीं के गांव के करीब 8 लोग काम करते हैं और तेलंगाना के अलग-अलग भट्टो में एकताल गांव के करीब 150 लोग काम करते हैं। घेसरू ने यह भी बताया कि वे अपनी शिकायत प्रशासन से कर चुके हैं और फंसे हुए लोगों को निकालने का आश्वासन दिया गया है।
डंडे से पीटने की देते हैं धमकी
मृतक की पत्नी सुभाषिनी झारा ने बताया कि उसके पति को ईंट भट्ठा का ठेकेदार दिन रात काम करवाता था। जिसके कारण उसकी मौत हो गई। इसके बावजूद ठेकेदार वहां काम करने वाले अन्य मजदूरों से भी लगातार काम करवा रहा है। घर जाने की बात करने पर वहां मौजूद लोगों के द्वारा गाली गलौज करते हुए डंडा दिखाकर मारने पीटने की धमकी दी जाती है।
रोजी रोटी की तलाश में कर रहे पलायन
एकताल गांव के रहने वाले सत्यकुमार झारा ने बताया कि उसके भाई नारायण झारा, बेटा गिरधारी, कन्हैया, बहु पूजा और कुमकुम के अलावा दो नाती दीपावली से पहले तेलगांना के रामकुंडम काम करने गए थे। उनके द्वारा बनाया हुआ सामान जहां वे बेचते थे वह नहीं बिक रहा था। इस वजह से रोजी रोटी की तलाश में वे भी गांव से पलायन कर चुके हैं। वहां मौजूद ठेकेदार के द्वारा उनका मोबाईल भी छीन लिया गया है। जिस वजह से उनसे बात भी नहीं हो पाती है।
कलेक्टर बोले- मामला प्रशासन के संज्ञान में आया है
कलेक्टर कार्तिकेया गोयल ने बताया कि इस मामले की सूचना मिली है। प्रशासन के संज्ञान में आया है कि एकताल गांव से संभवतः कुछ लोगों को उनके मर्जी के बगैर उनसे काम लिया जा रहा है। इस तरह की घटना की जानकारी तत्काल प्रशासन को देनी चाहिए। अगर उन्हें कोई दिक्कत होती है तो कार्रवाई की जाएगी। लेबर विभाग इस पर कार्रवाई करेगा।


