छत्तीसगढ़ राज्य का पहला और देश का 87वां पुलिस कमिश्नरी सिस्टम 11 दिन बाद 23 जनवरी से रायपुर में लागू होने वाला है। इसे लेकर दैनिक भास्कर ने एक सर्वे किया है। सर्वे में शामिल 90 फीसदी लोगों का कहना है कि पुलिस कमिश्नरी सिस्टम पूरे रायपुर जिले में लागू होना चाहिए। एक ही जिले में दो तरह की पुलिसिंग होने से अपराध बढ़ेगा और आम लोगों को भी दिक्कत होगी। राज्य के पहले स्मार्ट सिटी नवा रायपुर अटल नगर को भी पुलिस कमिश्नरी में शामिल किया जाना चाहिए और उसे देहात क्षेत्र में नहीं रखा जाना चाहिए। भास्कर के सर्वे में शहर के 2310 लोग शामिल हुए। अधिकांश लोग रायपुर में मजबूत पुलिस कमिश्नरी सिस्टम चाहते हैं। अधिकांश लोग चाहते हैं नवा रायपुर में हो कमिश्नरी नवा रायपुर अटल नगर से सरकार और शासन का संचालन होता है। यानी मंत्रालय, सचिवालय, पीएचक्यू और विधानसभा यहीं है। नया राजभवन, सीएम हाउस, मंत्री बंगले, विधायक निवास, सीएस-डीजीपी के बंगले भी इसी क्षेत्र में आएंगे। सर्वे में शामिल 90 फीसदी लोग चाहते हैं कि नवा रायपुर भी पुलिस कमिश्नरी का हिस्सा होना चाहिए। माना, मंदिर हसौद, विधानसभा भी इसमें शामिल होना चाहिए। भोपाल का सिस्टम देखने पहुंची रायपुर पुलिस एडिशनल एसपी तारकेश्वर पटेल के नेतृत्व में सीएसपी रमाकांत साहू और दीपक मिश्रा की टीम भोपाल गई है। टीम ने वहां तीन थानों, एसीपी (सीएसपी) सब-डिवीजन, एडिशनल डीसीपी, डीसीपी, एडिशनल कमिश्नर, ज्वाइंट कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर की कार्यप्रणाली का अध्ययन किया। एसीपी और डीसीपी कोर्ट में कितने स्टाफ की जरूरत होती है, इसकी भी जानकारी ली गई। इसके अलावा कमिश्नर के पास कौन-कौन से अधिकार और शक्तियां होती हैं, पुलिस लाइन, थाना और कार्यालय का सिस्टम कैसा है, इन सभी बिंदुओं पर अध्ययन किया जा रहा है। सीएएफ और नगर सेना से ली जाएगी फोर्स, पुलिस का अलग कोर्ट भी होगा थानों और अधिकारियों के लिए अतिरिक्त स्टाफ की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए सीएएफ और नगर सेना से कर्मचारियों की सेवाएं ली जाएंगी। यह व्यवस्था अस्थायी होगी। चर्चा है कि 300 से 500 जवानों की मांग की गई है। कमिश्नरी सिस्टम में अधिकारियों की संख्या बढ़ेगी और पुलिस का अपना अलग कोर्ट भी होगा, जिसके लिए अतिरिक्त फोर्स की जरूरत पड़ेगी। कानून व्यवस्था के लिए अलग से टीम रहेगी। इन बड़े शहरों में पूर्ण कमिश्नरी सिस्टम दिल्ली, मुंबई, भुवनेश्वर, पुणे, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, बेंगलुरु समेत कई बड़े शहरों में पूर्ण पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू है। इन शहरों में देहात पुलिसिंग का अलग सिस्टम नहीं है, बल्कि पूरे जिले में कमिश्नरी व्यवस्था लागू की गई है। ओएसडी नियुक्त करने की भी चर्चा चर्चा है कि 23 जनवरी को पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू कर आईजी रैंक के अधिकारी को ओएसडी नियुक्त किया जाएगा। वह एक माह के भीतर जिले में पूरा सिस्टम तैयार करेंगे। गृह विभाग बजट सत्र में विधानसभा में विधेयक लाकर छत्तीसगढ़ पुलिस एक्ट में संशोधन करेगा और नए प्रावधान जोड़ेगा। वर्तमान छत्तीसगढ़ पुलिस एक्ट में शहरी पुलिस का स्पष्ट प्रावधान नहीं है और कहीं भी कमिश्नरी शब्द का उल्लेख नहीं है। इसलिए कानून में संशोधन किया जाएगा। पुराना पीएचक्यू या कलेक्टोरेट में होगा दफ्तर संभागीय आयुक्त कार्यालय, जहां अभी अस्थायी एसपी कार्यालय संचालित हो रहा है, वहां फिलहाल पुलिस कमिश्नरी कार्यालय बनाया जाएगा। एक वर्ष के भीतर स्थाई कार्यालय तैयार किया जाएगा। सरकार पुराने पुलिस मुख्यालय या कलेक्टोरेट में कमिश्नर कार्यालय बनाने की तैयारी कर रही है। दोनों में से किसी एक स्थान को अंतिम रूप दिया जाएगा। तीन थानों में एक डीएसपी गृह विभाग ने कमिश्नरी सिस्टम का खाका तैयार किया है। इसके तहत तीन-तीन थानों का एक एसीपी (सीएसपी) सबडिवीजन होगा। उनके ऊपर एडिशनल डीसीपी होंगे, जो एएसपी रैंक के अधिकारी होंगे। इनके ऊपर डीसीपी होंगे, जो आईपीएस या एसपी रैंक के अधिकारी होंगे। डीआईजी रैंक के अधिकारी एडिशनल कमिश्नर और ज्वाइंट कमिश्नर बनाए जाएंगे। आईजी रैंक के अधिकारी पुलिस कमिश्नर होंगे। थानों का सेटअप यथावत रहेगा। थाने में टीआई प्रभारी होंगे, उनके साथ एसआई, एएसआई, हवलदार और सिपाही तैनात रहेंगे। इस तरह किया गया सर्वे… 1. सवाल: क्या रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होना चाहिए? जवाब: हां 2090 (90%) नहीं 180(08%) मालूम नहीं 40 (02%) 2. सवाल: पुलिस कमिश्नरी का क्षेत्र या दायरा कितना होना चाहिए? जवाब: -रायपुर शहर और नवा रायपुर 500 (22%) -संपूर्ण रायपुर जिला 1660 (72%) -सिर्फ नगर निगम क्षेत्र 150 (06%) 3. सवाल: नवा रायपुर अटल नगर के लिए पुलिस की कौन सी व्यवस्था होनी चाहिए? जवाब: -ग्रामीण पुलिसिंग 230(10%) -पुलिस कमिश्नरी 1990(86%) – मालूम नहीं 90 (04%) 4. सवाल: पुलिस कमिश्नर को प्रशासनिक अधिकार देने चाहिए या नहीं? जवाब: -हां 1920(83%) -नहीं 330(14%) -मालूम नहीं 60(03%) 5. सवाल: किस तरह की पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था राजधानी के अनुरूप ज्यादा प्रभावी होगी? जवाब: पूरे अधिकार दिए जाएं 1850 (80%) -सारे अधिकार नहीं देना चाहिए 460(20%) 6. सवाल: पुलिस कमिश्नरी और देहात पुलिसिंग में विभाजन से क्या होगा? जवाब: -कोई दिक्कत नहीं होगी 540(23%) -काम में दिक्कत होगी 1250(54%) – दोनों ही स्थिति बनेगी 520(23%) एमपी का कमजोर सिस्टम लागू करने की तैयारी सरकार भोपाल और इंदौर के कमजोर पुलिस कमिश्नरी सिस्टम को लागू करने की तैयारी कर रही है। इसी को लेकर गृह विभाग खाका तैयार कर रहा है। प्रस्ताव के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में पुलिस कमिश्नरी और ग्रामीण इलाकों में देहात एसपी सिस्टम लागू किया जाएगा। जबकि एडीजी प्रदीप गुप्ता की कमेटी ने भुवनेश्वर पुलिस कमिश्नरी सिस्टम को पूरे रायपुर जिले में लागू करने की अनुशंसा की है। इसमें पुलिस को 22 अधिकार देने का प्रस्ताव भेजा गया है। गृह विभाग ने इस रिपोर्ट पर अब तक विचार नहीं किया है। चर्चा है कि आईएएस एसोसिएशन, आईपीएस एसोसिएशन पर भारी पड़ गया है। इसे लेकर आईएएस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर चर्चा भी की है। रायपुर में आईएएस के अधिकारों में कटौती नहीं चाहते। जबकि डिप्टी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा अधिकारों से परिपूर्ण मजबूत पुलिस कमिश्नरी सिस्टम के पक्ष में हैं। …………………………….. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… कानपुर-वाराणसी फेल कमिश्नरी सिस्टम रायपुर में होगा लागू: एक ही जिले में 2 तरह की पुलिस व्यवस्था, गृह विभाग तैयार कर रहा ब्लू प्रिंट छत्तीसगढ़ में पहली बार रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम 23 जनवरी से लागू होने वाला है। इसे लेकर गृह विभाग खाका तैयार कर रहा है। मंत्री परिषद की बैठक के बाद जो रिपोर्ट सामने आई है, उसके अनुसार नगरीय निकाय क्षेत्र (22 शहरी थाने) में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर…


