राजधानी रायपुर में मंगलवार शाम ACB-EOW ने कार्रवाई करते हुए करन ट्रैवल्स के ठिकानों पर दबिश दी। गंज क्षेत्र स्थित पिथालिया कॉम्पलेक्स में मौजूद करन ट्रैवल्स के ऑफिस पहुंचकर टीम ने करीब दो घंटे तक दस्तावेजों की गहन जांच की। एसीबी अधिकारियों के अनुसार, शराब घोटाले की जांच के दौरान पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में कई बड़े राजनेताओं, अधिकारियों और संवैधानिक पदों पर रहे व्यक्तियों की विदेश यात्राओं और कश्मीर, तिरुपति, उदयपुर जैसे स्थानों की ट्रैवल हिस्ट्री सामने आई थी। जांच में पता चला कि इन यात्राओं के एयर टिकट और होटल बुकिंग करन ट्रैवल्स के जरिए कराए गए थे और उनका भुगतान कैश में किया गया था। यह भी आरोप है कि यह नकद पैसा शराब घोटाले से जुड़े काले धन से दिया गया था। बड़ी मात्रा में दस्तावेज जब्त इन्हीं सुरागों के आधार पर एसीबी-ईओडब्ल्यू ने मंगलवार को करन ट्रैवल्स के ऑफिस में छापामार कार्रवाई की। शाम साढ़े चार बजे पहुंची टीम को यहां से बड़ी मात्रा में दस्तावेज मिलने की पुष्टि हुई है। बताया जा रहा है कि जब्त किए गए कागजात में कई नेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों की विस्तृत ट्रैवल हिस्ट्री शामिल है। संचालक और बेटे से पूछताछ जारी फिलहाल, EOW के अधिकारी करन ट्रैवल्स के संचालक और उनके बेटे पूछताछ कर रहे हैं। पूछताछ दस्तावेजों में मिले भुगतान, बुकिंग और यात्राओं के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। टीम कुछ और स्थानों पर भी कार्रवाई कर सकती है। अब पढ़ें करन ट्रेवल्स किसका ? EOW के अफसरों के मुताबिक, करन ट्रेवल्स के संचालक जयंती भाई और उनके बेटे करन हैं। लंबे अर्से से गंज क्षेत्र स्थित पिथालिया कॉम्पलेक्स में बाप-बेटे मिलकर कारोबार चला रहे हैं। कांग्रेस कार्यकाल में कई अफसरों और राजनेताओं का टिकट कैश लेकर बनाने का आरोप है। दो दिन पहले 5 जिलों में मारी थी रेड 22 नवंबर को ACB-EOW के अफसरों ने रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, कोंडागांव और अंबिकापुर में छापामार कार्रवाई की थी। शराब घोटाले और DMF से जुड़े मामलों की जांच आगे बढ़ाते हुए टीमों ने रविवार तड़के करीब 19 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी थी। DMF घोटाले में हरपाल सिंह अरोड़ा और उनसे जुड़े व्यक्तियों और ठेकेदारों के यहां रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा, कोंडागांव, धमतरी और बलरामपुर मिलाकर 11 स्थानों पर सर्च की गई। वहीं शराब घोटाला प्रकरण में जेल में बंद अनिल टुटेजा और निरंजन दास के परिजनों से जुड़े बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और बस्तर के 8 ठिकानों पर छापे मारे गए। कार्रवाई के दौरान टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए हैं। एजेंसी ने बताया कि सभी जब्त सामग्री को जांच में शामिल किया जा रहा है और दोनों मामलों में आगे की जांच जारी है। 29 अक्टूबर को DMF घोटाले की जांच करने पहुंची थी टीम इससे पहले 29 अक्टूबर को जिला खनिज न्यास निधि (DMF) घोटाले से जुड़े सप्लायरों के 14 ठिकानों पर ACB और EOW की संयुक्त टीमों ने छापेमारी की थी। रायपुर में पचपेड़ी नाका स्थित वॉलफोर्ट इन्क्लेव में अशोक और अमित कोठारी के घर टीम ने रेड की थी। इनका कारोबार कृषि कच्चा माल, खाद्य पदार्थ से जुड़ा है। वहीं, राजनांदगांव शहर के भारत माता चौक स्थित राधा कृष्ण एजेंसी अग्रवाल के निवास, नहटा और भंसाली के ठिकानों पर भी कार्रवाई की गई थी। दुर्ग में महावीर नगर स्थित कारोबारी नीलेश पारख के यहां जांच की गई, जबकि धमतरी के सिर्री में 5 घंटे की कार्रवाई के बाद टीम लौट गई थी। अब जानिए क्या है DMF घोटाला ? प्रदेश सरकार की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक, ED की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने धारा 120 बी 420 के तहत केस दर्ज किया है। इस केस में यह तथ्य निकल कर सामने आया है कि डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड कोरबा के फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं की गईं है। टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुंचाया गया। ED के तथ्यों के मुताबिक, टेंडर करने वाले संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, ऋषभ सोनी और बिचौलिए मनोज कुमार द्विवेदी, रवि शर्मा, पियूष सोनी, पियूष साहू, अब्दुल और शेखर नाम के लोगों के साथ मिलकर पैसे कमाए गए।


