शादी और कई तरह के समारोह में कैटरिंग का काम करने वालों पर जीएसटी विभाग ने जबरदस्त सख्ती की है। जीएसटी चोरी के इनपुट पर स्टेट जीएसटी के अफसरों नेरायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और रायगढ़ के बड़े कैटरर्स के यहां छापा मारा। प्रारंभिक जांच में ही भारी गड़बड़ी पाई गई। कैटरर्स ने जिनके यहां काम किया उनके भुगतान की जानकारी ली गई। इतना ही नहीं कई जगहों पर विभाग के अफसरों ने ग्राहक बनकर कैटरिंग के काम का कोटेशन भी लिया। कोटेशन में दी गई कीमत और रिटर्न में दिखाई गई कीमत में बड़ा अंतर मिला। इसके बाद ही साबित हुआ कि कैटरर्स लाखों की टैक्स चोरी कर रहे हैं। दरअसल, अफसरों को इस बात की सूचना मिली थी कि आयोजनों में कैटरिंग का काम लाखों में किया जा रहा है, लेकिन जीएसटी रिटर्न में इसे हजारों में भी नहीं दिखाया जा रहा है। विभाग के अफसरों के पास इस बात के पुख्ता प्रमाण थे कि कैटरिंग करने वाले एक थाली का चार्ज 1000 से 3000 रुपए तक कर रहे थे, लेकिन रिटर्न में वे 300 से 500 का ही रेट दिखा रहे थे। पुख्ता प्रमाण और वीडियो मिलने के बाद ही सोमवार को एक साथ सभी जगहों पर छापेमारी की गई। 2 दिन में कैटरिंग का बिल 30 लाख रुपए
स्टेट जीएसटी की टीम ने रायपुर के ख्यात संस्कार कैटरर्स के यहां पहुंची। उन्होंने अपने रिकॉर्ड में एक दिन की शादी का कैटरिंग चार्ज 1.5 लाख से 2 लाख दिखाया था। लेकिन वे दो दिनों की शादी के लिए कैटरिंग का न्यूनतम 30 से 35 लाख रुपए लेते थे। कैटरर्स के मालिक लोकेश अग्रवाल के फोन को भी सीज किया गया है। संस्कार के साथ ही श्रीजी कैटर्स के संचालक का मोबाइल और डायरी को भी जब्त किया गया है। रायपुर के ही रॉयल कैटरर्स, पालीवाल कैटरर्स, दुर्ग के जलाराम, बिलासपुर के प्रतीक कैटरर्स तथा रायगढ़ के अजय कैटरर्स के यहां भी छापे मारे गए।


