राजधानी रायपुर स्थित आयुर्वेदिक महाविद्यालय परिसर में आयोजित पांच दिवसीय मेगा हेल्थ कैंप-2025 का सोमवार को भव्य समापन समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका, महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल रमेश बैस और विधायक एवं आयोजक राजेश मूणत उपस्थित रहे। समारोह में कैंप में सेवाएं देने वाले डॉक्टरों और समाजसेवी संस्थाओं का राज्यपाल द्वारा सम्मान भी किया गया। बता दें कि शिविर में 65 हजार मरीजों ने स्वास्थ्य लाभ लिया। इस दौरान 700 स्वास्थ्य कर्मियों ने सेवाएं दी। 65 हजार मरीजों का इलाज, अगले साल होगा आयोजन विधायक राजेश मूणत ने कहा कि इस महाअभियान को शहर की सामाजिक संस्थाओं का भरपूर सहयोग मिला। ऐसे सीनियर डॉक्टर, जो सामान्यतः घरों से बाहर नहीं निकलते थे, वे भी इस कैंप में सेवाएं देने पहुंचे। उन्होंने बताया कि ढाई हजार लोगों से शुरू हुआ यह अभियान आज रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। मूणत ने कहा कि पांच दिनों में 65,000 से अधिक मरीजों और नागरिकों को निःशुल्क परामर्श, जांच, उपचार, दवाइयों और दिव्यांग सहायता का लाभ मिला, जो अपने आप में ऐतिहासिक है। कई मरीजों ने सीधे आकर भी जांच कराई। जरूरतमंद मरीजों को स्पेशलिस्ट डॉक्टर उपलब्ध कराए गए और परीक्षण के बाद सभी को 5 दिन की मुफ्त दवाइयां दी गईं। उन्होंने घोषणा की कि अगले साल इसी तारीख पर फिर से मेगा हेल्थ कैंप आयोजित होगा। अटल जी का सपना पूरा – रमेन डेका राज्यपाल रमेन डेका ने अपने कई अनुभव साझा किए। उन्होंने स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े हर विचार की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस शिविर में देश के कई विशेषज्ञ डॉक्टरों ने निःशुल्क सेवाएं दीं। इस तरह के कैंप से लोग जागरूक होते हैं। अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य पहुंचे, यही अटल जी का सपना था। केंद्र और राज्य सरकार से मिली मदद – बैस महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि वे हर साल इस कैंप में आते रहे हैं और लोगों को इंतजार रहता था कि राजेश मूणत कब मेगा हेल्थ कैंप लगाएंगे। गरीबों को इलाज के लिए परेशानी होती है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार की वजह से लोगों को मदद मिल रही है। हजारों लोगों ने यहां आकर जांच कराई। प्रमुख 5 दिन में कुल परामर्श और जांचें 65,266 पांच दिवसीय शिविर के दौरान अलग-अलग विभागों में उपचार और जांच का आंकड़ा इस प्रकार रहा: शुगर जांच में सर्वाधिक 19,037 और बीपी जांच में 10,300 मरीजों का परीक्षण किया गया। नेत्र रोग विभाग में 4,266, दंत रोग में 2,440, हड्डी रोग में 1,025, और शिशु रोग विभाग में 548 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। एम्स ओपीडी में 1,220, मेडिसिन विभाग में 876, चर्म रोग में 798, नाक-कान-गला (ENT) में 780, पेट रोग में 513 और हृदय रोग विभाग में 210 मरीजों ने परामर्श लिया। सुपर स्पेशलिटी ओपीडी में 480, न्यूरोलॉजी में 305, यूरोलॉजी में 280, श्वसन व दमा रोग में 255, सर्जरी में 209 और कैंसर स्क्रीनिंग में 84 मरीजों की जांच की गई। वैकल्पिक चिकित्सा में आयुर्वेदिक उपचार का 5,351, होम्योपैथी का 3,455, एक्यूप्रेशर का 2,275, फिजियोथैरेपी का 1,350 और एक्यूपंक्चर का 303 मरीजों ने लाभ उठाया। जांच सेवाओं के अंतर्गत 7,801 ब्लड सैंपल लिए गए, 1,265 सोनोग्राफी, 887 एक्स-रे, 358 ईसीजी (ECG) और 35 ईको (ECHO) टेस्ट किए गए। इनके अलावा 60 यूनिट रक्तदान, 140 आयुष्मान कार्ड निर्माण के साथ-साथ दिव्यांग सहायता के तहत 186 जयपुर फुट, 70 कृत्रिम अंग, 205 श्रवण यंत्र और 257 बैसाखी, व्हीलचेयर व ट्राइसाइकिल का वितरण कर कुल 65,000 से अधिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं।


