रायसेन जिले में मकर संक्रांति का पर्व धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों-भोजपुर स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर, बेतवा व जाखा पुल, नर्मदा घाटों और रायसेन दुर्ग स्थित सोमेश्वर महादेव धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और विशेष आयोजन किए गए। भोजपुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में विशाल शिवलिंग का पतंगों और फूलों से विशेष श्रृंगार किया गया। सुबह से ही मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। दोपहर तक 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमलेश कुमार खरपुसे, एसडीओपी शीला सुराणा के नेतृत्व में 200 से अधिक पुलिस जवान विभिन्न स्थलों पर तैनात रहे। सांची रोड स्थित बेतवा पुल के किनारे और भोपाल रोड स्थित जाखा पुल पर मेले लगाए गए। यहां लगी दुकानों पर खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी। मेले के दौरान पुलिस और प्रशासन के जवान लगातार सुरक्षा व्यवस्था संभालते नजर आए। मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालुओं ने नर्मदा घाटों पर पहुंचकर शाही स्नान किया और दान-पुण्य किया। सुबह से ही घाटों पर भक्तों की भीड़ बनी रही। दो दिन मनाया जा रहा पर्व, जानिए शुभ मुहूर्त ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, बुधवार रात 9:35 बजे सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने के बाद गुरुवार 15 जनवरी को पूर्ण पर्व मनाया गया। पुण्यकाल गुरुवार सुबह 7:15 बजे से प्रारंभ हुआ। इसी कारण मकर संक्रांति का पर्व दो दिन मनाया जा रहा है और दो दिन तक मेले आयोजित किए गए हैं। सोमेश्वर महादेव धाम में पतंग उत्सव, गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे रायसेन दुर्ग स्थित सोमेश्वर महादेव धाम में हर-हर सोमेश्वर घर-घर सोमेश्वर अभियान समिति के तत्वावधान में पतंग उत्सव का आयोजन किया गया। प्रातः भगवान श्री सोमेश्वर महादेव को तिल के लड्डुओं का विशेष भोग अर्पित किया गया। तिल के लड्डुओं से निर्मित भव्य माला भी भगवान को अर्पित की गई। इसके बाद मंदिर प्रांगण में पतंग उत्सव आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, युवा और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरा धाम “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। अभियान समिति के सदस्य अंकित गुप्ता और शशिकांत जायसवाल ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सोमेश्वर महादेव मंदिर के पट प्रतिदिन खुले रखने और रायसेन सहित आसपास के क्षेत्रों से अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए प्रेरित करना है।


