रायसेन वन मंडल में बाघ गणना का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो गया है। यह गणना 5 जनवरी से 11 जनवरी तक चलेगी और पहली बार पूरी प्रक्रिया मोबाइल ऐप के जरिए की जा रही है, जिससे आंकड़े सीधे डिजिटल रूप में संकलित होंगे। गणना वन मंडल अधिकारी प्रतिभा शुक्ला के नेतृत्व में कराई जा रही है। दूसरे चरण की गणना का आगाज रायसेन वन मंडल में सोमवार से बाघ गणना का दूसरा चरण शुरू हुआ। इस चरण में वन्य प्राणियों की मौजूदगी का व्यवस्थित सर्वे किया जाएगा, ताकि वन क्षेत्र की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। इस बार गणना की पूरी प्रक्रिया मोबाइल ऐप आधारित रखी गई है। वन अमला मौके पर ही जानकारियां ऐप में दर्ज करेगा, जिससे आंकड़ों में पारदर्शिता बनी रहे और रिपोर्ट तुरंत उपलब्ध हो सके। गणना के शुरुआती तीन दिन, यानी 5 से 7 जनवरी तक, जंगल में मांसाहारी वन्य प्राणियों की उपस्थिति का सर्वे किया जाएगा। इसमें बाघ, तेंदुआ सहित अन्य शिकारी जीव शामिल हैं। अंतिम दिनों में शाकाहारी जीवों का आकलन 8 से 11 जनवरी तक शाकाहारी वन्य प्राणियों की मौजूदगी दर्ज की जाएगी। इससे जंगल के खाद्य चक्र और जैव विविधता की स्थिति का आंकलन किया जा सकेगा। पूरे वन मंडल में 140 से ज्यादा चयनित स्थानों पर सर्वे किया जा रहा है। हर स्थान पर वन अमला बाघों समेत अन्य वन्य प्राणियों के संकेतों को दर्ज करेगा। अलग-अलग दलों का गठन डीएफओ प्रतिभा शुक्ला के मार्गदर्शन में गणना के लिए अलग-अलग दल बनाए गए हैं। प्रत्येक दल को निश्चित क्षेत्र सौंपा गया है, ताकि सर्वे में कोई क्षेत्र छूट न जाए। एसडीओ सुधीर पटले ने बताया कि सर्वे के दौरान पगमार्क, मल, पेड़ों पर खरोंच जैसे संकेतों सहित कुल आठ मानक बिंदुओं के आधार पर वन्य प्राणियों की पहचान की जाएगी। सूर्योदय के साथ शुरू होगा काम हर दिन सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही वन अमला अपने-अपने क्षेत्र में पहुंचकर गणना कार्य शुरू करेगा, जिससे ताजा और सटीक संकेत मिल सकें। एसडीओ सुधीर पटले के अनुसार, वर्ष 2022 में बाघों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई थी, लेकिन इसके बाद शिकारी और वन माफिया के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की गई। अतिक्रमण हटने से सुरक्षित हुआ जंगल वन्य क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने और संरक्षण उपायों को मजबूत करने का असर अब दिखाई देने लगा है। इसी कारण बाघों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। चार साल पहले रायसेन वन मंडल में 10 से 15 बाघ पाए जाते थे। इस बार इनकी संख्या 15 से 20 से भी अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। तेंदुओं की संख्या 200 के पार रायसेन वन मंडल में तेंदुओं की संख्या भी लगातार बढ़ी है और यह 200 के पार पहुंच चुकी है, जो क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाता है। बाघ और तेंदुओं के अलावा रायसेन वन मंडल में भालू, सियार, हिरण, बारहसिंगा और नीलगाय जैसे कई अन्य वन्य प्राणी भी पाए जाते हैं।


