मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में हितग्राही राशन लेने के लिए 5 किलोमीटर ऊपर पहाड़ पर चढ़ रहे है। छत्तीसगढ़ सरकार मानसून सीजन में एक साथ 3 महीने का राशन दे रही है, इससे समस्या और बढ़ गई है। भरतपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत गढ़वार में मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं होने से नेटवर्क नहीं मिल पाता, जिससे पहाड़ पर चढ़कर प्रक्रिया पूरा करना होता है। 5 गांव के 400 हितग्राही हर महीने पहाड़ी पर चढ़ते है, ई-पास मशीन में अंगूठा लगाने के बाद राशन मिलता है। इस समस्या से परेशान ग्रामीणों ने प्रक्रिया को ऑफलाइन करने की मांग की है। 3 महीने का राशन लेने 6 बार अंगूठा लगाना पड़ता है राशन दुकान का संचालक एक दिन ई-पास मशीन में अंगूठा लगाने के लिए पहाड़ पर बुलाया जाता था और दूसरे दिन राशन वितरण होता था। मगर एक साथ तीन महीने के राशन वितरण के लिए एक हितग्राही को 6 बार अंगूठा लगाना पड़ रहा, जिससे समय अधिक लग रहा है और नेटवर्क समस्या के कारण काम धीरे हो रहा है। 5 गांव के 400 लोग प्रभावित 5 गांव गढ़वार, पटपरटोला, चंदेला, दर्रीटोला और मनटोलिया के हितग्राहियों के लिए राशन लेना एक समस्या बन गई है। वे कई दिन तक चक्कर लगा रहे है। दरअसल इस ग्राम पंचायत में मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं है जिसके कारण ई-पास मशीन काम नहीं करता। वहीं गांव से दूर पहाड़ी पर कुछ टावर काम करते हैं, जिसके कारण ग्रामीणों को पहाड़ी पर जाना पड़ता है। ग्रामीण बताते हैं कि पहले ऑफलाइन राशन वितरण के दौरान गांव में ही ग्रामीणों को राशन मिल जाता था, लेकिन जब से राशन की प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है, गांव वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बुजुर्ग राशन कार्डधारियों के लिए मुसीबत जानकारी के मुताबिक, पहाड़ पर चढ़ने के बाद टावर आता है। जहां राशन के लिए e-POS मशीन में ग्रामीणों की एंट्री करवाई जाती है। बारिश के बीच ही राशन कार्ड धारी महिला, बुजुर्ग और पुरुष पहाड़ पर पहुंचते हैं। कुछ ग्रामीण अपने हाथों में छाते और बारिश से बचने की अन्य व्यवस्था रखते है तो कुछ ऐसे ही बारिश में भीगते हुए e-POS मशीन में एंट्री करवाने पहुंचते है। ऐसा भी नहीं है कि वहां पहुंचने के बाद तुरंत प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है। ग्रामीण बताते हैं कि इस काम में कई बार पूरा दिन बीतने के साथ ही कई दिन भी लग जा रहे हैं। ग्रामीणों ने सुनाई समस्या ग्रामीण पंचलाल ने बताया कि राशन का चावल लेने के लिए आए हैं। अभी तक फिंगर नहीं लगा है, पूरा दिन पहाड़ पर बैठना पड़ता है। बारिश के मौसम में भी जंगल में 50 फीट पहाड़ चढ़कर ऑनलाइन एंट्री करवाने आना पड़ता है। ग्रामीण सुंदरलाल सिंह ने बताया कि जब जब राशन लेने आना पड़ता है दूसरा कोई काम नहीं हो पाता, 2 से तीन दिन लगातार आना पड़ता है। गांवों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या, इसलिए पहाड़ की चढ़ाई करना पड़ता है। गांव की बुजुर्ग महिला श्यामबाई ने बताया कि पहाड़ पर चढ़ने में थक जाते हैं, कई बार गिर भी जाते हैं। गरीब हैं, पेट के लिए डोंगरी चढ़ते हैं। राशन दुकान संचालक ने खाद्य विभाग को दी जानकारी गांव के सरपंच रामफल पंडो बताते हैं मैं कई बार खाद्य विभाग में जानकारी दे चुका हूं कि गांवों में नेटवर्क की समस्या के कारण बहुत परेशानी होती है। ऑफलाइन दुकान की मांग की। खाद्य अधिकारी ने बताया कि ऑफलाइन दुकान नहीं होगा। अब सिर्फ ऑनलाइन राशन दुकान ही चलेगी।4जी नेटवर्क नहीं होने के कारण ई पास मशीन नहीं चल पाती, पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है, लेकिन अधिकारी कहते हैं कि धीरे धीरे मशीन चलेगी। बारिश के दिनों में गांव वालों को बहुत परेशानी उठानी पड़ती है। जिला खाद्य अधिकारी जतिन देवांगन ने बताया कि जो भी समस्या है शासन को इसकी जानकारी दी जा चुकी है। शासन से ऑफ लाइन राशन वितरण की सहमति मिलने के बाद यहां भी ऑफलाइन वितरण की अनुमति दी जाएगी। वर्तमान स्थिति में भरतपुर विकासखंड और केल्हारी में कुल तीस शासकीय राशन दुकान ऑफलाइन संचालित हैं। हमारा प्रयास है कि इस ग्राम पंचायत में जल्द ऑफलाइन राशन वितरण हो।


