राष्ट्रकथा में दबदबा सुनकर बृजभूषण फूट-फूटकर रोए:गोंडा में रितेश्वर महाराज बोले- मैं इनका बाप हूं, मेरा भी दबदबा था, है और रहेगा

गोंडा में चल रही राष्ट्रकथा के दूसरे दिन पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह फूट-फूटकर रोने लगे। करीब एक घंटे तक वह अपने पुराने संघर्षों को याद कर आंसू बहाते रहे। इसका वीडियो भी सामने आया है। दरअसल, राष्ट्रकथा के दौरान सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज ने राष्ट्र के नाम संदेश दिया। इस दौरान मंच से बृजभूषण शरण सिंह के “दबदबे” का जिक्र किया। अवध क्षेत्र और गोंडा का जिक्र करते हुए कहा- यहां लोग कहते हैं कि बृजभूषण का दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा। उन्होंने खुद को बृजभूषण शरण सिंह का पिता बताते हुए कहा, यहां इनका बाप बैठा है। मेरा भी दबदबा था, है और रहेगा। उन्होंने कहा कि मैंने पूरे भारतवर्ष में मां भारती, भगवान राम, भगवान कृष्ण और हनुमानजी के लिए कथा करने के बदले आज तक किसी से एक रुपया भी स्वीकार नहीं किया। सब कुछ भगवान की कृपा से चल रहा है। आगे भी ऐसे ही चलता रहेगा। खंडित हो रहे राष्ट्र को जोड़ने के उद्देश्य से हो रही कथा
सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज ने कहा- यह कथा केवल राष्ट्र को दिशा देने के लिए और खंडित हो रहे राष्ट्र को जोड़ने के उद्देश्य से हो रही। इस कथा के जरिए उन सभी पक्षों को उजागर किया जाएगा, जिनसे राष्ट्र मजबूत हो। उसकी एकता एवं अखंडता अक्षुण्ण बनी रहे। देश के 140 करोड़ लोग सनातन संस्कृति को मानने वाले हैं
सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज ने कहा- अगर इस व्यासपीठ से कोई सनातन संस्कृति की बात कर रहा, तो मैं गर्व के साथ कहता हूं कि भारत में रहने वाले 140 करोड़ लोग सनातन संस्कृति को मानने वाले हैं। भले ही उनके पूर्वज किसी भी परिस्थिति में कहीं चले गए हों। लेकिन संस्कृति सनातन ही थी, सनातन ही है और सनातन ही रहेगी। उन्होंने साफ कहा कि हम यहां तोड़ने नहीं, बल्कि राष्ट्र और सनातन को एक करने आए हैं। सनातन बिखरा हुआ है। इस कथा को न सिर्फ यहां, बल्कि देश-विदेश में भी लोग सुन रहे हैं। जीवन राष्ट्र और भगवान को समर्पित किया
सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज ने कहा- राष्ट्रकथा करने का अधिकार उसी को है, जिसने पूरी तरह भगवान राम और राष्ट्र पर स्वयं को न्योछावर कर दिया हो। जिसने अपनी जवानी, वाणी, कहानी और पूरी जिंदगानी राष्ट्र के लिए समर्पित कर दी हो, वही भारत की एकता और अखंडता को जोड़ सकता है। उन्होंने कहा- यह सौभाग्य की बात है कि महाराजा दिलीप के इस प्रांगण में भारत का सबसे बड़ा पर्यटन क्षेत्र बनने जा रहा है। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि यह ऐसा क्षेत्र बनेगा, जहां नंदिनी गोमाता और महाराजा दिलीप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग आएंगे। बृजभूषण ने राष्ट्र के लिए दिल निकाल कर रख दिया
सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने कहा कि जैसे कोई अपने प्रिय से कहता है कि उसने अपना दिल निकालकर रख दिया है। उसी तरह बृजभूषण शरण सिंह ने इस क्षेत्र, राष्ट्र निर्माण और सनातन को एक करने के लिए अपना दिल निकालकर रख दिया है। बृजभूषण नंदिनी माता और महाराजा दिलीप के उपासक हैं। करण भूषण सिंह, प्रतीक भूषण सिंह और उनके परिवार से भी उन्होंने कथा को सुनकर इस कीर्ति को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। छोटी उम्र में पांच भाइयों को खोया, छात्र संघ से सियासत में की एंट्री बृजभूषण सिंह का जन्म 8 जनवरी 1957 को गोंडा जिले के बिसनोहरपुर गांव में हुआ था। वो जब 12 साल के थे तो 2-3 साल के अंदर उनके 5 भाइयों की मौत हो गई। घर की सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उनके चचेरे बाबा विधायक थे, इसलिए परिवार का राजनीतिक रसूख था। साथ ही रंजिश भी काफी थी। 16 साल की उम्र में ही बृजभूषण राजनीतिक रूप से सक्रिय होने लगे थे। इसके बाद जब उन्होंने साकेत कॉलेज में दाखिला लिया तो 1979 में छात्रसंघ का चुनाव जीता। बृजभूषण के हैं 48 डिग्री कॉलेज, कई इंटर कॉलेज भी हैं पोस्ट ग्रेजुएट, बृजभूषण राजनीति में लगातार हाथ आजमाते रहे। साल 1991 में पहली बार आनंद सिंह के खिलाफ बृजभूषण सिंह लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। इसके बाद वो 1991, 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019 लोकसभा के निर्वाचित सदस्य बने। उनके करीबी बताते हैं कि 80 के दशक में बृजभूषण अपने तीन दोस्तों के साथ बालू खनन की ठेकेदारी करते थे। राजनीति के साथ-साथ वो धीरे-धीरे शिक्षा के क्षेत्र में उतरे। आज गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती समेत पूरे देवीपाटन मंडल में उनके 48 डिग्री कॉलेज हैं और कई इंटर कॉलेज भी हैं। गाय के नाम पर बनाया नंदिनी ग्रुप, स्कूल-कॉलेज की चेन बनाई सांसद बृजभूषण खुद को माटी से जुड़ा हुआ बताते हैं। उन्होंने अपने स्कूल-कॉलेज की चेन का नाम नंदिनी के नाम से रखा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम की नगरी अयोध्या से गोंडा जिला लगा हुआ है। जिसका प्राचीन नाम गोनर्द हुआ करता था। यहां ऋषि मुनि तपस्या किया करते थे। मान्यता है कि इसी भूमि पर रघुकुल के गुरु वशिष्ठ का आश्रम था। यहीं राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न ने शिक्षा ग्रहण की थी। ऋषि वशिष्ठ के पास एक नंदिनी नाम की गाय थी। ऋषि वशिष्ठ उस गाय की पूजा करते थे। इसी मान्यता के चलते बृजभूषण शरण सिंह ने 11 नवंबर 1994 को नंदिनी नगर महाविद्यालय की नींव रखी थी। इसके बाद उन्होंने कई स्कूल कॉलेज का नाम नंदिनी ग्रुप के नाम से रखा। इसमें इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, इंजीनियरिंग, नर्सिंग और मैनेजमेंट के कॉलेज शामिल हैं। बृजभूषण लग्जरी लाइफ को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। डेढ़ करोड़ रुपए का घोड़ा भी उनकी अस्तबल की शान बढ़ा रहा है। इसे उन्होंने खरीदा नहीं था, बल्कि गिफ्ट में मिला था। गिफ्ट देने वाले सांसद बेटे करण भूषण सिंह के दोस्त हैं। बृजभूषण ने खुद घोड़े का वेलकम किया था। उसे दुलारा था। जब उन्हें इसकी कीमत का पता चला तो ठहाका लगाते हुए कहा- यार, हम तो पागल हो जाएंगे। इस गिफ्ट से पहले यहां तीन महंगे मारवाड़ी घोड़े पहले से मौजूद थे। इनमें से एक बादल, कीमत करीब 10 लाख रुपए और दूसरा बुलेट, जिसकी कीमत करीब 8 लाख रुपए है। नए घोड़े के आने के बाद अब घोड़ों की संख्या चार हो गई है। इसके अलावा बृजभूषण के पास 150 से अधिक गायें हैं, जिनमें से करीब 70 गिर नस्ल की हैं। गिर नस्ल की प्रत्येक गाय की कीमत 5 लाख रुपए से अधिक आंकी जाती है। 5 एकड़ में बना सफेद बंगला, जिसमें हेलीपैड भी जिम के बाद अकसर घुड़सवारी करने चले जाते हैं ————————- ये खबर भी पढ़िए… गैंगरेप कर बच्ची की हत्या, लाश तीसरी मंजिल से फेंकी:बुलंदशहर में आरोपियों का एनकाउंटर, पुलिस ने पैर में गोली मारी यूपी के बुलंदशहर में 6 साल की बच्ची के साथ दो युवकों ने गैंगरेप किया। फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। बच्ची शुक्रवार शाम अपने घर के बाहर अकेले खेल रही थी, तभी आरोपी उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ में ले गए। बारी-बारी से रेप किया। पुलिस के मुताबिक, पकड़े जाने के डर से बच्ची को जान से मारकर लाश तीन मंजिला मकान की छत से नीचे फेंककर फरार हो गए। पढ़िए पूरी खबर…

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