भास्कर न्यूज| महासमुंद सरायपाली हिन्दू समाज के तत्वावधान में नगर के अग्रकुंज परिसर, थाना रोड (सेंट्रल बैंक के सामने) में भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन सुबह 10 बजे शुरु हुआ, जिसमें नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से हजारों की संख्या में सनातन प्रेमियों, समाजसेवियों, धर्माचार्यों, बुद्धिजीवियों, समाज प्रमुखों, युवाशक्ति, मातृशक्ति तथा नन्हे बालक-बालिकाओं ने सहभागिता दी। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के तैलचित्र के समक्ष वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि स्वामी रविंद्र दास महाराज (संस्थापक, स्वामी सुमेधानंद वैदिक गुरुकुल, कटंगपाली) ने हिन्दू संस्कृति की गौरवशाली परंपरा, सामाजिक समरसता, इतिहास तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर अपने विचार रखे। सम्मेलन में धर्म, संस्कृति, राष्ट्र और समाज से जुड़े विविध विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने सनातन परंपराओं की महत्ता, भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत, सामाजिक समरसता तथा राष्ट्र निर्माण में समाज की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि इसमें युवाओं की भागीदारी ही महत्वपूर्ण है। भावी पीढ़ी को अपने इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया। विशिष्ट अतिथि कृष्ण राधिका सखी दीदी ने समाज को संगठित करने, शिक्षा, संस्कार और सेवा के माध्यम से सकारात्मक कार्य करने का आह्वान किया। आपसी सहयोग से ही चुनौतियों का समाधान संभव: मुख्य वक्ता ओम प्रकाश शर्मा (सह प्रांत बौद्धिक प्रमुख, छत्तीसगढ़) ने कहा कि हिन्दू समाज की एकता और आपसी सहयोग से ही सामाजिक चुनौतियों का समाधान संभव है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाने और संस्कृति-परंपराओं को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। पंच परिवर्तन के अंतर्गत स्वदेशी भाव का जागरण, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्यों पर भी विचार व्यक्त किए गए। वक्ताओं ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य हिन्दू समाज की एकता, अखंडता, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सामाजिक चेतना को सुदृढ़ करना रहा। सम्मेलन के दौरान संत-महात्माओं के प्रेरक उद्बोधन, भक्तिमय भजन-कीर्तन तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक और उत्साहपूर्ण बना रहा। आयोजन समिति द्वारा अनुशासन और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए पृथक बैठने की व्यवस्था, स्वयंसेवकों ने पार्किंग, मार्ग-निर्देशन और स्वच्छता जैसे कार्यों को कुशलतापूर्वक संभाला।


