रासलीला का महत्व व अर्थ जीवात्मा और परमात्मा का मिलन : महाराज

सिटी रिपोर्टर | बोकारो बैशाली मैदान में आयोजित श्रीमद भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ में सचिन कौशिक महाराज ने श्रीकृष्ण लीला पर प्रवचन दी। उन्होंने कहा कि भागवत कथा में रासलीला, कृष्ण और गोपियों के दिव्य प्रेम और जीवात्मा-परमात्मा के मिलन का अद्भुत वर्णन है। भागवत के दशम स्कंध में वर्णित है; रास (नृत्य) और लीला (खेल) का संगम है, जो शरद पूर्णिमा की रात यमुना तट पर होती है, जिसमें कृष्ण उतने रूप धारण करते हैं, जितनी गोपियां थीं। इसे शुद्ध भक्ति का परम संदेश माना जाता है, जहां गोपियां अपने अहंकार को त्यागकर कृष्ण में लीन हो जाती हैं। इससे भक्तों को कृष्ण की शुद्ध भक्ति प्राप्त होती है। रासलीला का महत्व और अर्थ जीवात्मा और परमात्मा का मिलन है। बताया कि कृष्ण ने उद्धव को मथुरा से ब्रज भेजा ताकि वे गोपियों को ज्ञान (निर्गुण ब्रह्म, योग) का उपदेश दें और कृष्ण को भूलने के लिए कहे। लेकिन गोपियों की भक्ति देकर उद्धव भी भक्त बन जाते हैं। इससे पूर्व कथा का शुभारंभ भाजपा नेता कमलेश राय, साध्वी झा, इंदु बरनवाल, नेहा देवी, राम किशुन, पीयूष, गणेश अग्रवाल ने संयुक्त रूप से किया। अतिथि के रूप में पूर्व विधायक बिरंची नारायण, भाजपा नेता सुभाष प्रसाद सिंह, अविनाश सिंह, इंद्रासन चौधरी पूर्व डीएसपी, वीरभद्र प्रसाद सिंह, नीरज कुमार, यजमान योगेंद्र कुमार चौधरी व शालिनी कुमारी, रवि शंकर, विकास राजहंस, मनीष कुमार, राम नरेश प्रसाद, अशोक कुमार, बीरेंद्र कुमार, गगन दास, मधुसूदन, रामकुमार, ओमप्रकाश, आदित्य तिवारी, नेहा देवी, सुनीता देवी, इंदु बरनवाल देवी, नीलम सिंह, पवन सिंह आदि मौजूद रहे।

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