राहत शिविरों में जिंदगी कैद:हरदा ब्लास्ट के 2 साल बाद भी जख्म हरे के हरे, आज भी राहत शिविर में परिवार

हरदा के बैरागढ़ में अग्रवाल बंधुओं की पटाखा फैक्ट्री में 6 फरवरी 2024 को सुबह 11.20 बजे हुए दो भीषण धमाकों को शुक्रवार को दो साल पूरे हो रहे हैं, लेकिन पीड़ितों की मुश्किलें अब भी खत्म नहीं हुईं। हादसे में 13 लोगों की मौत हुई, एक अब भी लापता है और 301 घायल हुए थे। कई मकान अब भी खंडहर हैं, जबकि 7 परिवार राहत शिविरों के 10×10 फीट कमरों में रहने को मजबूर हैं। प्रशासन ने आईटीआई, ग्राम पंचायत भवन और सिविल लाइन चौकी को अस्थायी आश्रय बनाया था। पीड़ितों को नए कलेक्टर सिद्धार्थ जैन से उम्मीद थी, लेकिन समस्याएं जस की तस हैं। नर्सरी संचालक दिनेश सोनी समेत कई घायलों का इलाज अब भी जारी है और आर्थिक संकट गहरा गया है। कुछ परिवारों ने मदद न मिलने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। फैक्ट्री स्थल पर अब भी मलबा, अधजली सुतलियां और अव्यवस्था बनी हुई है। अब तक कितनी मदद
संयुक्त कलेक्टर सतीश राय के अनुसार प्रशासन ने 5.34 करोड़ रुपए की सहायता दी। इसमें 13 मृतकों के परिजनों को 2.79 करोड़, 301 घायलों को 16.65 लाख, 34 क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 2.21 करोड़ और 201 विस्थापितों को 16.65 लाख रुपए शामिल हैं। राहत शिविरों में 13 माह तक भोजन व चाय-नाश्ते पर करीब 90 लाख खर्च हुए। इलाज, दर्द व आजीविका का संकट
दिनेश सोनी के 7 ऑपरेशन हो चुके हैं और इलाज में 7 लाख खर्च हुए, जबकि सहायता केवल 50 हजार मिली। रमाबाई को 10 सर्जरी करानी पड़ी, तुलसा बाई आज भी चलने में असहज हैं। कई परिवार राहत शिविरों में रह रहे हैं, वहीं खाली मकानों से जेवर और सेंटिंग चोरी होने के मामले अब तक अनसुलझे हैं।

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