राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता मामला-फैसला सुरक्षित:28 जनवरी को जजमेंट डे, लखनऊ MP-MLA कोर्ट में सुनवाई पूरी

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता मामले में लखनऊ की विशेष MP-MLA कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है। विशेष न्यायाधीश एवं तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) आलोक वर्मा की अदालत ने सभी दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। 28 जनवरी 2026 को अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा। मामला पहले रायबरेली की विशेष MP-MLA अदालत में विचाराधीन था। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के आदेश पर इसे लखनऊ स्थानांतरित किया गया था। स्थानांतरण के बाद इसे क्रिमिनल मिस केस के रूप में पुनः क्रमांकित कर केस संख्या 31/2026 दी गई है। याचिकाकर्ता ने खुद की पैरवी, 8 दिन चली सुनवाई याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने स्वयं अदालत में पैरवी की। लगातार 8 दिनों तक सुनवाई चली, जिसमें कुल 20 घंटे से अधिक समय तक बहस हुई। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों, कानूनी नजीरों और विस्तृत तर्कों के जरिए अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। 45 एनेक्सचर, सीलबंद दस्तावेज और 310 पन्नों की पत्रावली रिकॉर्ड पर अदालत ने मामले से जुड़े 45 एनेक्सचर, एक सीलबंद लिफाफा और 310 पन्नों की विस्तृत पत्रावली को रिकॉर्ड पर लिया है। न्यायालय ने इन सभी दस्तावेजों को अंतिम निर्णय के उद्देश्य से स्वीकार किया है। याचिकाकर्ता ने की FIR दर्ज करने की मांग याचिका में राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923, पासपोर्ट अधिनियम 1967 और विदेशी अधिनियम 1946 के तहत FIR दर्ज कराने का आदेश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि मामले में गंभीर कानूनी उल्लंघन किए गए हैं। राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं और उनकी भारतीय नागरिकता रद्द की जानी चाहिए। उनका कहना है कि उन्होंने ब्रिटेन सरकार से जुड़े कुछ ईमेल और दस्तावेज जुटाए हैं, जो राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता का प्रमाण हैं। इन दस्तावेजों को अदालत के समक्ष पेश किया गया है। गृह मंत्रालय-हाईकोर्ट में रखे साक्ष्य इस पूरे प्रकरण से जुड़े साक्ष्य पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय और इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष भी प्रस्तुत किए गए थे। उनके अनुसार भारत सरकार ने इस मामले में ब्रिटेन सरकार से भी आधिकारिक स्तर पर संपर्क किया है, हालांकि अब तक वहां से कोई औपचारिक जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। विग्नेश शिशिर का यह भी कहना है कि कुछ गोपनीय दस्तावेज उन्होंने जांच के लिए सीबीआई को सौंपे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बदला सुनवाई का स्थान याचिकाकर्ता के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की सुनवाई रायबरेली की MP-MLA कोर्ट में की जा रही थी। इसी दौरान उन्होंने अपनी जान को खतरा होने का हवाला देते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और सुनवाई लखनऊ की MP-MLA कोर्ट में कराए जाने की मांग की थी। इस मांग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि पूरे प्रकरण की आगे की सुनवाई लखनऊ स्थित विशेष MP-MLA कोर्ट में की जाए। इसके बाद मामला रायबरेली से ट्रांसफर होकर लखनऊ की अदालत में भेजा गया था। …………………………………. यह खबर भी पढ़ें शराब-सिगरेट के लिए दोस्त की हत्या, पेट्रोल डालकर लाश जलाई: लखनऊ में सिर पर गमला पटका, गिरते ही चाकू से गला रेत दिया लखनऊ में शराब-सिगरेट के लिए युवक की दो दोस्तों ने हत्या कर दी। पहले उसके सिर पर गमला मारा। फिर बेहोश होते ही चाकू से गला रेत दिया। पहचान छिपाने के लिए पेट्रोल छिड़ककर शव को आग लगा दी। यहां पढ़ें पूरी खबर

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