रिटायर्ड शिक्षक डिजिटल अरेस्ट, साढ़े 29 लाख की ठगी:48 घंटे रखा ऑनलाइन जोड़कर रखा, ठग बोले- रामायण की कसम खाओ, किसी को बताया तो मर्डर हो जाएगा

भिंड शहर में रिटायर्ड टीचर प्रेम सिंह कुशवाह को साइबर ठगों ने 48 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रखा। उन्हें व उनकी पत्नी को किसी से बातचीत करने की अनुमति नहीं दी। इतना ही नहीं बदमाशों ने झांसा देकर 29.50 लाख की भी ठगी कर डाली। रविवार को पीड़ित परिवार ने पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत की है। कोतवाली थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। ऐसे किया डिजिटल अरेस्ट भिंड की मीरा कॉलोनी में रहने वाले रिटायर्ड टीचर प्रेम सिंह कुशवाह ने दैनिक भास्कर से चर्चा करते हुए बताया कि 7 जनवरी की दोपहर मेरे कॉलोनी में एक गमी हो गई थी। मैं शव यात्रा में शामिल होकर अर्थी के पीछे-पीछे जा रहा था। तभी मेरे मोबाइल की घंटी बजी। मैंने फोन रिसीव किया। फोन पर बोलने वाले व्यक्ति ने स्वयं को दिल्ली से भारत सरकार का इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताया। मैंने पूछा- हां बताइए, क्या हो गया। तभी फोन पर दूसरी ओर से बोल रहे व्यक्ति ने कहा कि आपने मनी लॉन्ड्रिंग में करोड़ों रुपए का लेन-देन किया है। संजय राउत जो कि इस केस का मास्टर माइंड है, उसने आपका नाम बताया था। इस केस में 47 लोगों की लिस्ट है, जिसमें अंतिम नाम आपका है। रिटायर्ड टीचर ने कहा कि मैं कुछ भी समझ नहीं पाया। इसी समय उसने कहा कि आपको गिरफ्तारी देनी होगी। मैंने कहा कि मैंने कुछ नहीं किया। इस पर उसने कहा कि आपका खाता मुंबई के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के केनरा बैंक में है। मैंने कहा कि मैं कभी मुंबई नहीं गया। इस समय मैं अर्थी के पीछे-पीछे श्मशान की ओर जा रहा था। तभी ठग बोला- बहुत शोरगुल हो रहा है। आप तत्काल घर पहुंचें और ऑनलाइन मुझसे बातचीत करें। मुंबई आने के लिए कहा
इसके बाद मैं शव यात्रा से हटकर सीधे अपने घर आया। उसने इस दौरान कहा कि किसी कमरे में पहुंचें और मैं अपनी दूसरी मंजिल के कमरे में गया। यहां एक विपिन नाम युवक मुझसे बातचीत करता रहा। वह करीब तीन घंटे तक बातचीत करता रहा। इस दौरान उसने पहले बताया कि आपको कल तक मुंबई पहुंचना है। इस पर मैंने कहा कि मैं कभी मुंबई गया नहीं हूं, ना ही मैं जानता हूं। मैं डायबिटीज का मरीज हूं, कैसे पहुंच सकूंगा। इस पर उसने थोड़ी नरमी अपनाई और कहा कि ठीक है, मैं मुंबई सिटी के डीएसपी क्राइम को ऑनलाइन जोड़ रहा हूं, जो कि ऑनलाइन ही आपसे केस संबंधी जानकारी पूछेंगे। इस दौरान एक अन्य पुलिस वाले को उसने वीडियो कॉल पर जोड़ा। इस प्रक्रिया में फर्जी डीएसपी से लेकर एसपी, पुलिस कमिश्नर लोग शामिल थे। सभी के कंधों पर स्टार, अशोक चिन्ह था। कोई भी फर्जी नहीं लग रहा था। उनके बातचीत करने के तरीके से मैं झांसे में आ गया। रामायण की कसम खिलाई
करीब तीन घंटे की बातचीत के बाद मैंने खाना खाने के लिए बोला तो उसने एक घंटे का समय दिया। खाना खाने से पहले उसने मुझसे पूछा कि किस देवी-देवता को मानते हो। मैंने कहा मैं सभी को मानता हूं। मैं गमी में जा रहा था, मैंने अब तक नहाया भी नहीं है। इस पर उसने कहा कि रामचरित मानस उठाओ। उस पर हाथ रखो कि किसी को कुछ नहीं बताओगे, नहीं तो केस खराब हो जाएगा और तुम पूरी तरह फंस जाओगे। इस पर मैंने कसम खा ली। इस पर उसने कहा कि तुम्हारे कमरे में कौन है। मैंने कहा कि मेरी पत्नी। वह बोला उनसे भी कसम खिलवाओ, वह भी किसी को नहीं बताएगी। इस पर मेरी पत्नी ने कसम नहीं खाई, हां इतना जरूर कहा कि मैं किसी को नहीं बताऊंगी। इस तरह पहला दिन एक घंटे का रेस्ट दिया। फिर एक घंटे बाद पुनः ऑनलाइन आ गया। उसने वीडियो कॉलिंग के माध्यम से अलग-अलग लोगों से बातचीत कराता रहा। शाम छह बजे उसने कहा कि कल सुबह यानी आठ जनवरी को नौ बजे न्यायालय में आपकी वीडियो कॉलिंग पर पेशी होगी। इस पर मैंने सवाल किया कि आखिर देश की कोई भी न्यायालय सुबह आठ या नौ बजे नहीं लगती। किसी को बताया तो मर्डर हो जाएगा
इस पर उसने कहा कि आपका केस अलग प्रकार का है। उसने इस समय यह भी कहा कि बैंगलूर की डॉ. श्वेता भी ऐसे केस में फंस गई थी। वह ट्रेन से सफर कर रही थी। तभी संजय राउत के लोग बहुत खतरनाक हैं। उसने उस महिला डॉक्टर को ट्रेन के अंदर ही मरवा दिया है। तुम अगर घर के बाहर निकले या किसी को बताया तो तुम्हारा भी मर्डर हो सकता है। इस समय उसने कहा कि न्यायालय में सबसे पहले तुम्हारी पेशी करवा दूंगा। किसी से भीड़भाड़ नहीं होगी। यदि तुम सही हो तो क्लियरेंस सर्टिफिकेट भी यहीं से जारी करवा दूंगा। दूसरे दिन एक मजिस्ट्रेट ऑनलाइन आए। उनके सामने वही ठग अपनी-अपनी बात कहता रहा। इस दौरान मजिस्ट्रेट की कुर्सी पर सफेद पोशाक में बैठा युवक बार-बार ऑर्डर-ऑर्डर कहता रहा। ठग ने मजिस्ट्रेट के सामने मुझे ऑनलाइन पेश किए जाने के समय सफेद कपड़े पहनने के लिए कहा था। मैंने कुर्ता-पजामा पहनकर पेशी दी। दूसरे दिन मजिस्ट्रेट पूरे समय यानी रात में भी मोबाइल को वीडियो कॉल पर ऑन रखने को बोला था। दो दिन व रात में वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क में रहा। इस दौरान उसे इस बात की भी जानकारी लगातार लग रही थी कि मोबाइल की बैटरी कितने प्रतिशत है। वह मोबाइल को चार्जिंग पर लगाए रखने की बात कहता रहा। इसके तीसरे दिन मुझसे बोला कि किसी को बताए बिना सीधे बैंक पहुंचो। आपके खाते में 29 लाख 50 हजार हैं। ये सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी न्यायालय के खाते में। तभी आपका क्लियरेंस जारी होगा। यही एक प्रक्रिया है। आगामी 48 घंटे में आपका क्लियरेंस सर्टिफिकेट जारी हो जाएगा, तब तक किसी के संपर्क में मत आना, लगातार ऑनलाइन संपर्क में रहना। बैंक में भी मोबाइल ऑनलाइन जेब में रखवाया तीसरे दिन उसने कहा कि आप सीधे बैंक जाएं। वहां बैंक से सिक्योरिटी मनी के लिए पैसा मेरे द्वारा बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर करें। तभी उसने कहा कि बैंक मैनेजर इतना पैसा निकालने के बारे में पूछेगा तो उसे बताना कि बेटा प्रॉपर्टी का काम कर रहा है, उसे जरूरत है। जब मैं बैंक गया तो मैंने जेब में मोबाइल रखा, वह भी वीडियो कॉलिंग पर जुड़ा रहा। बैंक मैनेजर ने पैसा निकालने का कारण पूछा तो उसके बताए अनुसार मैंने कहा कि बेटा प्रॉपर्टी का काम कर रहा है, उसे जरूरत है। इसके बाद उसके बताए हुए अकाउंट में पैसा ट्रांसफर कर दिया। रात के समय मुझे बेचैनी हुई। जब पूरे दिन निकलने के बाद उसकी ओर से कोई सर्टिफिकेट नहीं मिला। इसके बाद मैंने बेटी, बेटा व दामाद को पूरी बात बताई। इसके बाद मैंने एसपी ऑफिस साइबर सेल को जानकारी दी। इसके बाद सिटी कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज कराया। ठगों ने 20 खातों में ट्रांसफर किया पैसा
पुलिस ने प्राथमिक जांच में बताया कि मेरे द्वारा जिस खाते में रुपए भेजे गए, वह गुजरात के बड़ोदरा का खाता धारक है। इस खाते से अब तक 20 खातों में यह पैसा ट्रांसफर किए जाने की जानकारी लगी है। इस पूरे मामले में सिटी कोतवाली थाना टीआई ब्रजेंद्र सेंगर का कहना है कि रिटायर्ड टीचर की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की विवेचना शुरू कर दी गई है।

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