रिटायर होने भोपाल आते हैं एमपी-सीजी के पीसीसीआईटी:एक साल में चार अफसरों की पदस्थापना, अभी भी प्रभार के सहारे चल रही व्यवस्था

देश को 33 हजार करोड़ से अधिक का राजस्व देने वाले एमपी छत्तीसगढ़ के प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर इनकम टैक्स (पीसीसीआईटी) को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने रिटायरमेंट के लिए बना दिया है। एक साल में यहां चार अधिकारी पदस्थ हो चुके हैं और अभी भी जिस अधिकारी को यहां की पीसीसीआईटी बनाया गया है वे जयपुर में पदस्थ हैं और भोपाल में अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। आयकर विभाग के एमपी-सीजी सर्किल के सबसे बड़े अधिकारी पीसीसीआईटी की यहां लंबे समय से स्थायी पदस्थापना नहीं हो पा रही है। इसका असर मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के कामकाज पर भी पड़ रहा है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सर्किल के भोपाल स्थित मुख्यालय में प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (पीसीसीआईटी) के पद पर एक साल के दौरान चार अधिकारी तैनात किए गए, जो महज तीन से चार माह का कार्यकाल पूरा कर रिटायर हुए हैं। लंबा कार्यकाल न होने के कारण इनमें से कोई भी अधिकारी न तो राजस्व बढ़ाने को लेकर कोई बड़ी तैयारी कर सका और न ही रिकवरी बढ़ाने के प्रयासों को अमली जामा पहनाने की प्लानिंग करा सका। बुधवार को एमपी-सीजी सर्किल के पीसीसीआईटी ललित कृष्ण दहिया भी रिटायर हो गए। वे सितंबर माह में मुंबई से प्रमोट होकर भोपाल आए थे और तीन माह बाद ही 31 दिसम्बर को रिटायर हो गए। अब वित्त मंत्रालय ने एमपी-सीजी सर्किल में प्रभारी पीसीसीआईटी की नियुक्ति की है। इसकी जिम्मेदारी राजस्थान सर्किल के पीसीसीआईटी सुमीत कुमार को अतिरिक्त प्रभार के रूप में सौंपी गई है। ऐसे चलती रही 2025 में एमपीसीजी में पदस्थापना व्यवस्था एमपी सीजी सर्किल में पदस्थ पीसीसीआईटी पुरषोत्तम त्रिपुरी एक जनवरी 2025 को पीसीसीआईटी बनाए गए थे। वे तीन माह का छोटा कार्यकाल पूरा कर 31 मार्च को रिटायर हो गए। इसके बाद 1 अप्रैल से नवरतन सोनी को पदस्थ किया गया। वे जुलाई में रिटायर हो गए। इसके बाद केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से 31 अगस्त तक इस पद का अतिरिक्त प्रभार यूपी की तत्कालीन पीसीसीआईटी अपर्णा करण को सौंप दिया, जो एकाध बार ही भोपाल आईं। फिर ललित कृष्ण दहिया ने 1 सितंबर से पीसीसीआईटी पद की जिम्मेदारी संभाली और वे भी चार माह के कार्यकाल के बाद रिटायर हो गए। अब एमपी सीजी सर्किल में आयकर विभाग का सबसे बड़ा पद फिर से अतिरिक्त प्रभार में चला गया है। उम्मीद है कि अगले माह तक भोपाल में पीसीसीआईटी के नए नाम का ऐलान कर दिया जाएगा। रिकवरी और कलेक्शन पर असर विभाग में स्थायी अधिकारी न होने का असर उसके कामकाज पर होता है। आयकर विभाग का मूल काम टैक्स कलेक्शन और रिकवरी का है। इन हालातों में जो भी अफसर यहां आता है उसे स्थानीय कार्यप्रणाली को समझने और प्लानिंग बनाने में ही एक माह का समय बीत जाता है। इसके बाद जब तक रेवेन्यू के साथ रिकवरी बढ़ाने के प्रयास शुरू होते हैं, तब तक अफसर रिटायर हो जाता है। रेवेन्यू कलेक्शन और रिकवरी में इजाफे की सारी कोशिशें वापस ठंडे बस्ते में चली जाती हैं।

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