रिम्स के डॉक्टरों को प्रबंधन का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी हाल में मरीजों की पर्ची में ब्रांडेड दवाओं के नाम न लिखे जाए। जेनरिक दवाएं ही लिखंें। लेकिन, हर दिन डॉक्टर ओपीडी से लेकर वार्डों में भर्ती मरीजों के भी प्रेस्क्रिप्शन में न तो जेनरिक दवा लिख रहे हैं और न ही दवा के कंपोजिशन का नाम। अब भी वे धड़ल्ले से ब्रांडेड दवा का ही नाम लिख रहे हैं। दैनिक भास्कर ने इसकी पड़ताल की। शनिवार सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक करीब 40 मरीजों के पर्चे जुटाए। सभी पर्चे में केवल दवा के ब्रांड नेम लिखे मिले। कुछ दवाओं के ऐसे नाम भी लिखे मिले जो रिम्स परिसर की सिर्फ गिनी-चुनी दवा दुकानों में ही मिलते हैं। जो ब्रांडेड दवा चिकित्सक लिखते हैं, उन दवाओं की जेनरिक में कीमत आधे से भी कम है। शिकायत मिलने पर होगी जांच : रिम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि सभी डॉक्टरों को पूर्व में ही कई बार निर्देश दिया गया है कि हर हाल में जेनरिक दवा ही प्रिस्क्राइब करें। इसके बाद भी अगर डॉक्टर जेनरिक दवा न लिखकर ब्रांडेड दवा लिख रहे हैं तो यह सही नहीं है। शिकायत मिलने पर प्रबंधन इसकी जांच कराएगा। जो पर्ची भास्कर के हाथ लगे उनमें ये दवाएं लिखी मिलीं… इनकी ब्रांडेड व जेनरिक में कीमत का अंतर जानिए दवा ब्रांडेड जेनरिक आईवी लीवोफ्लोक्स 500 एमजी 265 90 आईवी. लेसिक्स 140 40 आईवी डॉक्सीसाइक्लिन 950 330 आईवी अर्टेसूनेट 290 110 आईवी लीवोपील 500 एमजी 150 68 टैब. लीवोजोन 210 45 टैब. ऑक्सकार्ब 300 एमजी 250 50 टैब. क्रीमालैक 168 52 टैब. एन्जिट 40 15 टैब. एल्डैक्टॉन 12.5 एमजी 75 20 केस स्टडी-2: मरीज अनुपम को 9 दवा खरीदने में 2200 रु. लगे मेडिसिन विभाग में भर्ती मरीज अनुपम कुमार सांस की समस्या से पीड़ित है। सांस के अलावा कुछ अन्य बीमारी भी है। इस भर्ती मरीज को वार्ड से पर्ची में लिखकर दवा लिखी गई है। सभी दवा के ब्रांड नेम लिखे हुए हैं। ये दवाएं रिम्स के स्टॉक में नहीं हैं, बाहर से लाने को कहा गया है। मरीज के परिजन को 9 दवा खरीदने में 2200 रुपए खर्च करने पड़े। पर्ची में लीवोफ्लोक्स 500, टैबलेट एल्डैक्टॉन 12.5 एमजी, इंजेक्टशन एलामिन एसएन समेत अन्य दवा शामिल थे। केस स्टडी-1 : मरीज रबिना खातून को डॉक्टर ने 5 ब्रांडेड दवाएं लिखीं न्यूरोलॉजी ओपीडी में इलाज कराने आई 36 वर्षीय मरीज रबिना खातून को डॉक्टर ने 5 दवाएं प्रेस्क्राइब की। बिना सिर दर्द की समस्या लेकर अस्पताल पहुंची थी। डॉक्टर द्वारा एमआरआई जांच और कुछ ब्लड इन्वेस्टिगेशन कराने की सलाह दी। इसके अलावा पर्ची में जो पांच दवाएं लिखी, उनमें ऑक्सकार्ब 300 एमजी, टैबलेट लीवोजेन समेत अन्य दवाएं लिखी हैं। बताते चलंे कि ऑक्सकार्ब की ब्रांडेड में कीमत 198 रुपए है, जबकि जेनरिक में 40 रुपए के करीब। वहीं, दूसरी दवा 15 की स्ट्रीप की कीमत 600 के करीब है, जबकि यहीं दवा जेनरिक में 150 रुपए में उपलब्ध है। इधर, रिम्स में शुरू हुआ नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्रेशन रांची | रिम्स में शनिवार से नई व्यवस्था के तहत मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया गया। नेक्सटजेन सॉफ्टवेयर से पहले दिन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी तरह सुचारू रही। कर्मियों ने बताया कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पहले से सरल और तेज हो गई है। जांच के लिए पर्ची और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के अलावा मरीजों के सारे रिकॉर्ड को इस सॉफ्टवेयर में माइग्रेट कर दिया गया है। इससे रिम्स के ई-हॉस्पिटल सिस्टम को और अधिक मजबूती मिली है। कुछ दिनों में मरीजों के सारे रिकॉर्ड को चिकित्सक सॉफ्टवेयर के माध्यम से ही देख सकेंगे। उनकी पुरानी सभी बीमारियों और उनको दी गई दवाओं का भी रिकॉर्ड दर्ज रहेगा। इससे वैसे मरीज जो लंबे समय से रिम्स में इलाज कराते रहे हैं, उनको पुरानी पर्ची और जांच रिकॉर्ड देखने अपने साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं होगी। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से दस्तावेज भी सुरक्षित किए जा सकेंगे।


