रीवा की ग्राम पंचायत करहिया को खाद वितरण केंद्र बनाए जाने के बाद वहां खाद लेने पहुंचे किसानों की भारी भीड़ जमा हो गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कुछ देर के लिए भगदड़ जैसे हालात बन गए। खाद पाने की होड़ में किसान आपस में भिड़ गए और देखते ही देखते मारपीट शुरू हो गई। बाल-बाल टला बड़ा हादसा गनीमत यह रही कि भीड़ के दबाव में कोई व्यक्ति कुचला नहीं गया, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार हालात काफी देर तक बेकाबू बने रहे। प्रशासनिक व्यवस्था रही नाकाफी खाद वितरण केंद्र पर भीड़ नियंत्रण, लाइन व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नजर नहीं आए। सीमित संसाधनों और कमजोर प्रशासनिक व्यवस्था के चलते हालात को संभालने में काफी परेशानी हुई। इस समय रबी सीजन चल रहा है और किसान गेहूं, सरसों और चना जैसी फसलों के लिए खाद की व्यवस्था में जुटे हैं। इसी वजह से बड़ी संख्या में किसान खाद वितरण केंद्र पर पहुंचे थे।
यूरिया डालने का यह है सही समय कृषि विशेषज्ञों के अनुसार रबी फसलों में बुवाई के समय अक्टूबर–नवंबर में डीएपी और पोटाश का उपयोग किया जाता है, जबकि बुवाई के 30 से 45 दिन बाद दिसंबर-जनवरी में पहली या दूसरी सिंचाई के समय यूरिया डालना सबसे उपयुक्त होता है। यूरिया की आवश्यकता के चलते करहिया खाद वितरण केंद्र पर किसानों की संख्या लगातार बढ़ती गई, लेकिन वितरण व्यवस्था उसी हिसाब से नहीं बढ़ाई गई। किसानों ने उठाए प्रशासन पर सवाल किसानों का आरोप है कि यदि खाद वितरण की पहले से सही योजना बनाई जाती और पर्याप्त कर्मचारी व सुरक्षा बल तैनात किए जाते, तो इस तरह की अव्यवस्था और मारपीट की नौबत नहीं आती। घटना के बाद किसान संगठनों और ग्रामीणों ने मांग की है कि खाद वितरण केंद्रों पर पर्याप्त स्टाफ, पुलिस बल और टोकन या लाइन व्यवस्था लागू की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।


