रीवा में लगातार प्रसूताओं के गलत इलाज और इलाज में लापरवाही बरते जाने के मामले सामने आ रहे हैं। इस बीच बीमा क्लेम के पैसे और अप्रूवल चार घंटे बाद आने की वजह से अस्पताल पर महिला को रेफर ना करने का आरोप है। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से महिला का अधिकांश खून बह गया, जिसकी वजह से वह मौत की कगार पर पहुंच गई। दरअसल रीवा के निजी अस्पताल को प्रसूता की मौत का कारण बताकर एक अधिवक्ता ने थाने में शिकायत की है। पुलिस ने पूरे मामले में संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की है। थाना प्रभारी विकास कपीस के मुताबिक प्रार्थना अस्पताल के लापरवाही से मौत की शिकायत मिली है। पहले भी अस्पताल से ऐसे मामले सामने आए हैं। मामले को पूरी गंभीरता से जांच में लिया गया है। रूटीन चेकअप के लिए लेकर गए, भर्ती किया
मरीज के परिजन अधिवक्ता अनिल सिंह ने बताया कि मैंने अपनी बहू को प्रार्थना अस्पताल में डिलीवरी के पहले दिखाया था। जहां डॉक्टर ने उसकी हालत और सभी जांच रिपोर्ट सामान्य बताई। 4 फरवरी को हम उसे फिर अस्पताल में रूटीन चेकअप के लिए लेकर गए। जहां बहू अंजली को डॉक्टर सोनल ने अस्पताल में भर्ती कर लिया। उस समय उसमें 13 प्रतिशत हीमोग्लोबिन था। ‘सामान्य डिलीवरी भी करवाई जा सकती थी’
उन्होंने कहा कि पानी की कमी है इसलिए डिलीवरी आज ही करवानी पड़ेगी। जबकि बहू पूरी तरह से स्वस्थ्य थी। उसकी सामान्य डिलीवरी भी करवाई जा सकती थी। रात 9 बजे तक उसकी हालत बिल्कुल सामान्य थी। पर रात साढ़े 9 बजे के बाद कुछ ऐसी दवाई दी गई की उसकी हालत खराब हो गई। तुरंत नर्स ने उसे प्राइवेट रूम से ऑपरेशन थिएटर में भर्ती कर दिया। उसके बाद हम लोगों को बहू से मिलने नहीं दिया गया। रात साढ़े 11 बजे कहा गया कि ऑपरेशन से बच्ची पैदा हुई है। ये भी बताया गया कि जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। धोखे से साइन कराया, जानकारी भी नहीं दी
अनिल सिंह ने बताया कि अचानक थोड़ी देर बाद हालत अति गंभीर बता दी और 10 यूनिट ब्लड चढ़ाने का कहने लगे। बचने के चांस भी कम बताने लगे। इसके साथ ही उसकी बच्चेदानी भी निकाल दी। धोखे से किसी से साइन कराया और जानकारी भी नहीं दी। हमने कहा कि अगर आपके बस का नहीं तो कम से कम रेफर तो कर दो। कुछ ही घंटे में आपको हेल्थ बीमा क्लेम से इलाज के पूरे पैसे मिल जाएंगे। इस दौरान 1 लाख 9 हजार 750 रुपए का बिल बनाया गया था। पर बीमा कंपनी से अप्रूवल आने में 4 घंटे का समय लगा। तब तक हमें उसे देखने तक नहीं दिया गया। हमने कहा कि एक बार उसे करीब से देख तो लेने दो। फिर जब बीमा का पैसा मिला तब रेफर किया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। ‘बहुत खून बह चुका है, अब बचना सम्भव नहीं’
हालांकि हमारे बहुत मिन्नत करने पर जबलपुर के अस्पताल में मरीज को भर्ती कर लिया। लेकिन पहले ही बता दिया कि रीवा में इलाज के दौरान लापरवाही हुई है। बहुत खून बह चुका है। अब बचना सम्भव नहीं है। अगर भर्ती कराना चाहें तो करवा सकते हैं। जबकि पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन की तरफ से सोनल अग्रवाल ने कहा कि लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। आरोपों में सच्चाई नहीं है। हमने महिला के इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती है।


