रीवा जिले में मकर संक्रांति पर्व को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस वर्ष 14 और 15 जनवरी को मनाए जाने वाले त्योहार के लिए प्रशासन और स्थानीय आयोजन समितियां धार्मिक स्थलों, जलप्रपातों और नदी तटों पर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। शहर के प्रमुख मंदिरों से लेकर ग्रामीण अंचलों के पिकनिक स्पॉट तक मेलों की रौनक दिखने लगी है। प्रशासन का पूरा जोर इस बात पर है कि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी न हो। रीवा शहर के किला परिसर स्थित महामृत्युंजय मंदिर में परंपरा के अनुसार एक दिवसीय भव्य मेला लगेगा। इसे लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना और दान-पुण्य के साथ-साथ खरीदारी और पारंपरिक खानपान की दुकानें सजने लगी हैं। दुकानदारों ने अपनी जगहें चिन्हित कर ली हैं और मेला क्षेत्र में साफ-सफाई का काम तेजी से कराया जा रहा है। क्योटी जलप्रपात में 4 दिन चलेगा मेला
जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल क्योटी जलप्रपात, देवतालाब, बसामन मामा, चिन्नईधाम, लक्ष्मणबाग और कोठी कंपाउंड के मनकामेश्वर देवालय में भी मेलों और धार्मिक आयोजनों की परंपरा है। खासतौर पर क्योटी जलप्रपात में लगने वाले चार दिवसीय मेले को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। यहां सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस और प्रशासनिक अमले की तैनाती की योजना बनाई गई है। मेला शुरू होने से एक दिन पहले वरिष्ठ अधिकारी मौके पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। नदी तटों पर भी जुटेंगे श्रद्धालु
चोरहटा थाना क्षेत्र के नौबस्ता चौकी अंतर्गत मध्यपुर गांव में करियारी नदी के तट पर लगने वाले मेले के लिए भी तैयारी शुरू हो गई है। नदी तट की साफ-सफाई और दुकानों की व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस ने यहां दुकानदारों और ग्रामीणों से शांति बनाए रखने और नियमों का पालन करने की अपील की है। इन स्थानों पर रहेगी प्रशासन की विशेष नजर
जिला प्रशासन ने उन सभी स्थानों की सूची तैयार कर ली है, जहां मकर संक्रांति पर भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। इनमें प्रमुख स्थान हैं… मोहनिया टनल, भैरवनाथ मंदिर, चिरहुला नाथ मंदिर और महामृत्युंजय मंदिर। इन सभी जगहों पर भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। तिल-गुड़ और झूलों का आकर्षण
संक्रांति के मेलों में तिल-गुड़ से बने पकवान, दान-पुण्य और पारंपरिक खरीदारी का विशेष महत्व है। बच्चे जहां झूले, खिलौने और खेलों का आनंद लेंगे, वहीं बड़े धार्मिक अनुष्ठानों और दर्शन-पूजन में शामिल होंगे। संक्रांति से पहले ही जिले में उत्सव का माहौल बनना शुरू हो गया है।


