रीवा स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज में पहली बार देहदान करने वाले व्यक्ति को शनिवार को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया, जिससे चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और भावुक क्षण सामने आया। 82 वर्षीय रामकरण गुप्ता, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन वृद्ध आश्रम में बिताया, ने मृत्यु के उपरांत अपना शरीर चिकित्सा अनुसंधान के लिए दान कर समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर पुलिस कर्मियों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, वहीं मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने पुष्प अर्पित कर देहदाता को श्रद्धांजलि दी। पूरे कार्यक्रम के दौरान मेडिकल कॉलेज परिसर में सम्मान, संवेदना और प्रेरणा का वातावरण बना रहा। 15 शवों की जरूरत होती है
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल ने बताया कि यह पहली बार है जब रीवा मेडिकल कॉलेज में किसी देहदान करने वाले व्यक्ति को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया है। मेडिकल स्टूडेंट्स को स्टडी के लिए साल में कम से कम 15 शवों की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि यह सम्मान मध्य प्रदेश सरकार के उस निर्णय के तहत दिया गया है, जिसके अंतर्गत देहदान करने वाले व्यक्तियों को विशेष सम्मान प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। डीन डॉ. अग्रवाल ने कहा कि देहदान चिकित्सा शिक्षा की आधारशिला है। मेडिकल छात्रों को मानव शरीर की संरचना और कार्यप्रणाली को समझने के लिए देहदान अत्यंत आवश्यक होता है। रामकरण गुप्ता द्वारा किया गया। यह देहदान आने वाली पीढ़ियों के डॉक्टरों के लिए अमूल्य योगदान साबित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के सम्मान से समाज में देहदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होगी और लोग इस महादान के लिए प्रेरित होंगे। अधिक लोगों से देहदान की अपील
जानकारी के अनुसार, रामकरण गुप्ता ने अपना अधिकांश जीवन एक वृद्ध आश्रम में बिताया। पारिवारिक सहयोग के अभाव में भी उन्होंने समाज के लिए उपयोगी निर्णय लेते हुए देहदान का संकल्प लिया। उनका यह निस्वार्थ कदम यह संदेश देता है कि मानव सेवा मृत्यु के बाद भी संभव है। कार्यक्रम के दौरान मेडिकल छात्रों ने भी देहदान के महत्व को समझते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और अधिक से अधिक लोगों से देहदान के लिए आगे आने की अपील की। यह आयोजन न केवल एक सम्मान समारोह रहा, बल्कि समाज को देहदान जैसे पुनीत कार्य के प्रति जागरूक करने वाला प्रेरणास्रोत भी बना।


