साकेत नगर गणेश मैदान में 5 जनवरी से चल रही आनंदमयी भागवत ज्ञान गंगा सप्ताह में कथाव्यास पुराण प्रभाकर शशांक शेखर महाराज रसमयी श्रीमद् भागवत महापुराण का आनंद बरसा रहे हैं। कथा के छठवें दिन श्री कृष्ण की मथुरा गमन लीला, उद्धव संवाद जैसी मार्मिक लीलाओं सहित, श्री कृष्ण के विवाह की लीलाओं का प्रसंग सुनाया। नंदबाबा और यशोदा मैया के साथ गोकुल में 5 वर्ष11 माह का समय बिताने के बाद कन्हैया मथुरा के संदेश वाहक अक्रूर की बातें सुन उनके साथ जाने को तैयार हो जाते हैं। अक्रूर की बातें सुनकर यशोदा और नंदबाबा दुःखी हो जाते हैं।
गोप ग्वाल सब उदास होकर दुःखी मन से कृष्ण को मथुरा नही जाने को कहते हैं। छोटे से कन्हैया सभी गोकुल वासियों को समझाते हुए कि मैं वापस लौटकर आऊंगा, मैं मेरी मैया से दूर नही रह सकता कहकर..मथुरा चले जाते हैं। 11 वर्ष बाद उद्धव कृष्ण का संदेश लेकर वापस आते हैं और सभी ब्रजवासियों की दशा देखकर भावुक हो जाते हैं। नंदबाबा को कन्हैया की बात बताते हैं और खुद भी दुःखी मन से वापस लौट जाते हैं। योगेश्वर कृष्ण के विवाह की मनमोहक झांकी
मथुरा की लीला को पूर्ण कर कृष्ण द्वारका के राजा बन जाते हैं। कृष्ण के गुणों को सुनकर रुक्मणी उनसे विवाह के लिए उन्हें प्रेम पत्र भेजती हैं। रुक्मणी का पत्र सुनते ही कन्हैया उन्हें वरण करने के लिए चले जाते हैं। गौरी पूजन के लिए गई रुक्मणी को योगेश्वर श्रीकृष्ण सभी सैनिकों और उनके सखियों के मध्य से हाथ पकड़कर अपने रथ में सवार कर लेते हैं और उन्हें द्वारका लेकर आ जाते हैं। जिसके बाद धूमधाम से विवाहोत्सव मनाया जाता है। रुक्मणी विवाह की मनोरम झांकी ने सबका दिल जीत लिया।लूट के ले गया दिल जिगर.., आज मेरे श्याम की शादी है,… जैसे कृष्ण भजनों पर भक्तों ने जमकर नृत्य किया।


