रेगिस्तान के धोरों पर क्रिसमस की धूम:जैसलमेर में सजे आलीशान होटल, 300 व्यंजनों के साथ ‘लाइव कुकिंग’ का दिखेगा जादू

राजस्थान की स्वर्ण नगरी जैसलमेर, जो अपने सुनहरे किलों और मखमली धोरों के लिए दुनिया भर में मशहूर है, इन दिनों एक अलग ही रंग में रंगी नजर आ रही है। अवसर है प्रभु यीशु के जन्म यानी ‘क्रिसमस’ के त्योहार का। जैसलमेर के तमाम छोटे-बड़े होटल और रिसॉर्ट्स इस समय पर्यटकों से गुलजार हैं और क्रिसमस की पूर्व संध्या (क्रिसमस ईव) को यादगार बनाने के लिए यहां तैयारियों का सैलाब उमड़ पड़ा है। होटल मालिकों से लेकर स्टाफ तक, हर कोई अपने मेहमानों को खुश करने के लिए दिन-रात एक कर रहा है। दुल्हन की तरह सजा ‘गोल्डन सिटी’ का कोना-कोना जैसलमेर के पीले पत्थरों से बने आलीशान होटलों को इस बार विशेष लाइटिंग से सजाया गया है। रात के अंधेरे में जब इन पत्थरों पर रंग-बिरंगी रोशनी पड़ती है, तो ऐसा लगता है मानो पूरा शहर ही जगमगा उठा हो। होटलों के लॉबी और गार्डन एरिया में विशालकाय क्रिसमस ट्री लगाए गए हैं। ये ट्री केवल साधारण सजावट नहीं हैं, बल्कि इन्हें राजस्थानी हस्तशिल्प, छोटे-छोटे शीशों और रंगीन मोतियों से सजाकर एक अनूठा रूप दिया गया है। कहीं 20 फीट तो कहीं 30 फीट ऊंचे इन क्रिसमस ट्री के पास पर्यटक जमकर सेल्फी ले रहे हैं। होटलों में हुई शानदार तैयारियां तैयारियों के बीच होटल मेरियट के फूड एंड बेवरेज (FB) मैनेजर चेतन शर्मा ने बताया कि इस साल का जश्न वाकई में बहुत अलग और खास होने वाला है। उन्होंने बताया, “क्रिसमस केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि खुशियां बांटने का मौका है। हमारी टीम ने महीनों पहले से इसकी प्लानिंग शुरू कर दी थी। होटल मेरियट में हमने मेहमानों के स्वाद और उनकी पसंद को सबसे ऊपर रखा है। हमारा मुख्य फोकस ‘लाइव एक्सपीरियंस’ पर है, ताकि गेस्ट को लगे कि उनके लिए हर चीज फ्रेश और उनकी पसंद के मुताबिक तैयार की जा रही है।” 300 डिशेज का ‘महा-मेन्यू’: स्वाद का ऐसा संगम पहले नहीं देखा इस बार जैसलमेर के होटलों में खाने-पीने का जो इंतजाम किया गया है, उसने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। करीब 300 तरह की डिशेज का एक विशाल मेन्यू तैयार किया गया है। इसमें दुनिया के लगभग हर कोने का स्वाद शामिल करने की कोशिश की गई है। 60% लाइव थीम: आपकी चॉइस, आपके सामने कुकिंग इस बार की सबसे बड़ी खबर यह है कि होटलों में ‘60% लाइव थीम’ रखी गई है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें खाना पहले से बनाकर बर्तनों में नहीं भरा जाता, बल्कि 60 प्रतिशत व्यंजन मेहमानों के सामने लाइव काउंटर पर बनाए जाते हैं। चेतन शर्मा आगे बताते हैं कि “आजकल लोग अपनी डाइट को लेकर बहुत जागरूक हैं। कोई कम तेल मांगता है, तो कोई ज्यादा तीखा। लाइव कुकिंग में फायदा यह है कि शेफ मेहमान से पूछकर उनकी पसंद के हिसाब से सामग्री डालता है। इससे मेहमान को अपनी आंखों के सामने गरम और कस्टमाइज्ड खाना मिलता है, जिससे उनकी संतुष्टि दोगुनी हो जाती है।” राजस्थानी खाने की लाइव पेशकश जैसलमेर आने वाला हर विदेशी और घरेलू पर्यटक यहां के पारंपरिक स्वाद का दीवाना होता है। इसीलिए, लाइव थीम में राजस्थानी खाने को विशेष जगह दी गई है। लाइव काउंटर्स पर चूल्हे जैसी व्यवस्था की गई है, जहां बाजरे की रोटी, केर-सांगरी, लाल मांस और गट्टे की सब्जी लाइव बनाई जाएगी। रेगिस्तान की ठंडी हवाओं के बीच गरम-गरम बाजरे की रोटी और लहसुन की चटनी का स्वाद पर्यटकों के लिए एक अनमोल अनुभव होगा। शाम 7 बजे से मचेगा धमाल: जिंगल बेल्स और लाइव म्यूजिक बुधवार शाम 7 बजे से जश्न का आगाज होगा। कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों द्वारा की जाएगी। छोटे-छोटे बच्चे जब लाल टोपियां पहनकर “जिंगल बेल, जिंगल बेल” गाएंगे, तो पूरा माहौल क्रिसमस की मिठास से भर जाएगा। इसके तुरंत बाद लाइव म्यूजिक बैंड अपनी प्रस्तुति शुरू करेंगे। फ्यूजन पर मेहमान जमकर थिरकेंगे। जैसलमेर के लोक कलाकारों द्वारा सूफी और लोक गीतों का तड़का भी इस पार्टी में लगाया जाएगा। सांता क्लॉज का इंतजार और उपहारों की बारिश क्रिसमस बिना सांता क्लॉज के अधूरा है। रात ढलते ही पार्टी में सांता क्लॉज की एंट्री होगी। सांता अपने साथ एक बड़ा झोला लेकर आएंगे जिसमें बच्चों के लिए ढेरों चॉकलेट्स, खिलौने और सरप्राइज गिफ्ट्स होंगे। होटलों ने विशेष तौर पर सांता क्लॉज के बैठने के लिए ‘सांता कॉर्नर’ बनाया है, जहां बच्चे उनके साथ फोटो खिंचवा सकेंगे और अपनी विश मांग सकेंगे। पर्यटन और स्थानीय उत्साह जैसलमेर में इस बार क्रिसमस पर पर्यटकों की भारी भीड़ है। होटलों में करीब 100% बुकिंग हो चुकी है। न केवल बड़े होटलों में, बल्कि सम के धोरों पर स्थित टेंट हाउस और रिसॉर्ट्स में भी यही नजारा है। ऊंट की सवारी के साथ क्रिसमस मनाना विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। होटल प्रिया के मयंक भाटिया बताते हैं- जैसलमेर की अर्थव्यवस्था पूरी तरह पर्यटन पर टिकी है। इस तरह के भव्य आयोजनों से न केवल पर्यटकों को आनंद मिलता है, बल्कि स्थानीय गाइड, ऊंट पालकों और छोटे दुकानदारों की भी अच्छी कमाई होती है।

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