किशोरी से दुष्कर्म और हत्या जैसे जघन्य अपराध में सगे मौसा को दोषी पाते हुए कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है। कोर्ट ने उसे तीन धाराओं में दोषी पाते हुए तीनों में अलग-अलग उम्र कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी ने रिश्ते में मौसा होकर उसके साथ बलात्कार जैसा घृणित अपराध कर उसकी हत्या कर दी। वर्तमान परिदृश्य में महिला न केवल घर के बाहर बल्कि घर में रिश्तेदारों में भी असुरक्षित हैं। आरोपी मौसा द्वारा जिन परिस्थितियों में अपराध किया गया है, वह उसकी मानसिक और कुंठित मानसिक दशा को दर्शाता है। ऐसी दशा में आरोपी को कम सजा से दंडित किया जाना न्यायोचित और विधिपूर्ण नहीं है। बल्कि कठोर से कठोर दंड से दंडित किया जाना आवश्यक है। मौसा के कमरे में खून से लथपथ मिला था शव घटना 21 जून 2022 की है। 14 वर्षीय किशोरी के पिता ड्राइवर हैं और काम के सिलसिले में बाहर थे। मां अपनी दो बेटियों के साथ काम पर गई थी और बेटा खेलने चला गया था। शाम को जब वह बेटियों के साथ घर लौटी तो किशोरी घर पर नहीं दिखी, जबकि घर के बगल में रहने वाले मौसा के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। कई बार दरवाजा खटखटाने पर भी कोई आवाज नहीं आई। इस पर उसने आसपास के लोगों और अपनी बेटियों की मदद से दरवाजा तोड़ा तो देखा कि उसकी बेटी कमरे में मृत अवस्था में जमीन पर पड़ी हुई थी। नाटकीय घटनाक्रम में मौसा मिला घायल किशोरी के शव के पास मौसा खून से लथपथ पड़ा हुआ था और उसके गले पर चोट का निशान था। कमरे में आसपास काफी खून फैला हुआ था। आसपास के लोग मौसा को अस्पताल ले गए और किशोरी का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। जांच के दौरान पाया गया कि किशोरी के गले, चेहरे, पेट पर चोट के निशान थे और प्राइवेट पार्ट पर काफी खून था। ये मजबूत फोरेंसिक एविडेंस माता-पिता के बयान कमजोर, परिस्थितिजन्य साक्ष्य रहे ठोस तीन साल चली सुनवाई के बाद शुक्रवार को जिला कोर्ट ने मौसा को दुष्कर्म, हत्या में दोषी पाया। खास बात यह कि गवाहों में माता-पिता ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया और उनके बयान कमजोर रहे। अन्य गवाहों और खासकर परिस्थितिजन्य साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आदि मजबूत आधार रही जिनके आधार पर आरोपी को दोषी पाया। इन गंभीर धाराओं हुआ तिहरा कारावास
कोर्ट ने आरोपी को भादंवि की धारा 376-ए, 376 (2)(च) और धारा 302 में तीनों धाराओं में अलग-अलग आजीवन कारावास और कुल 30 हजार रु. के अर्थदंड से दंडित किया। अभियोजन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक प्रीति अग्रवाल, सुशीला राठौर और सहयोगी अविसारिका जैन (ADPO) ने की। कोर्ट ने इसके साथ ही मृतिका किशोरी के माता-पिता को 3 लाख रुपए की मदद दिलाने की अनुशंसा भी की है।


