रेलवे के नवाचार से बदलेगी सूरत:वंदे भारत, शताब्दी और बेंगलुरु राजधानी में बायोडिग्रेडेबल थाली में मिलेगा खाना, हर महीने 300 किलोग्राम से अधिक प्लास्टिक की खपत कम होगी

रेल यात्रियों को स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल सुविधा देने की दिशा में आईआरसीटीसी ने एक पहल शुरू करने का निर्णय लिया है। मार्च से वंदे भारत, शताब्दी और बेंगलुरु राजधानी एक्सप्रेस सहित चुनिंदा ट्रेनों में भोजन फल-सब्जियों के छिलकों से बनी बायोडिग्रेडेबल थाली में परोसा जाएगा। केवल इन तीन ट्रेनों में ही शुरुआत में हर महीने 50,000 से ज्यादा थालियों पर 300 किलो से अधिक प्लास्टिक की बचत होगी, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी। रेलवे और आईआरसीटीसी लगातार रेल परिसरों को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में अब ट्रेनों में परोसे जाने वाले भोजन के लिए पारंपरिक प्लास्टिक की जगह बायोडिग्रेडेबल थाली का उपयोग किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि पहले चरण में यहां से चलने और गुजरने वाली वंदे भारत, शताब्दी और बेंगलुरु राजधानी एक्सप्रेस में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके बाद अन्य प्रीमियम और लंबी दूरी की ट्रेनों में भी इसे विस्तार दिया जाएगा। आईआरसीटीसी के रीजनल इंचार्ज राजा भट्टाचार्य का कहना है कि ट्रेनों में उपयोग होने वाले भोजन को बायोडिग्रेडेबल थालियों में देने का प्रावधान किया गया है। 6 महीने में नष्ट हो जाती है यह थाली बायोडिग्रेडेबल थाली फल-सब्जियों के छिलकों, कागज और अन्य प्राकृतिक तत्वों से बनाई जाती है। उपयोग के बाद यह 3 से 6 महीने में गल-सड़कर मिट्टी में मिल जाती है, जबकि प्लास्टिक की थाली को खत्म होने में 400 से 500 साल लगते हैं। प्लास्टिक थाली टूटकर माइक्रोप्लास्टिक बनाती है, जो मिट्टी, पानी और भोजन श्रृंखला में घुसकर मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है। इसके विपरीत बायोडिग्रेडेबल थाली से न तो माइक्रोप्लास्टिक निकलता है और न ही जहरीले रसायन। इसके उत्पादन और निस्तारण में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन भी कम होता है। इससे कचरे का बोझ घटता है, लैंडफिल भरने की रफ्तार धीमी होती है और स्टेशन व रेल परिसरों को प्लास्टिक-मुक्त बनाने में मदद मिलती है। बायोडिग्रेडेबल थाली से फायदा : गर्म भोजन में प्लास्टिक से निकलने वाले रसायनों का खतरा नहीं होगा। यानी, रेल यात्रियों को अधिक सुरक्षित और स्वच्छ भोजन मिलेगा। प्लास्टिक कप, थैलियों पर पहले से है रोक
भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया का कहना है कि इससे पहले रेलवे ने प्लास्टिक कप और थैलियों के उपयोग पर रोक लगाकर कागज से बने कप और थैले अपनाए थे। अब बायोडिग्रेडेबल थालियों के उपयोग से यह प्रयास और मजबूत होगा। आईआरसीटीसी ने जन आहार और फूड प्लाजा संचालकों को भी निर्देश दिए हैं कि वे पर्यावरण-अनुकूल सामग्री का ही इस्तेमाल करें।

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