भास्कर न्यूज | अंबिकापुर उत्तर छत्तीसगढ़ के लोगों ने अंबिकापुर-रेणुकूट नई रेल लाइन परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी देने और इसे आम बजट 2026-27 में शामिल करने की मांग की है। बिलासपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक को भेजे गए पत्र में कहा है कि आजादी के आठ दशक बाद भी सरगुजा अंचल बृहत्तर रेलवे कनेक्टिविटी से वंचित है। यहां के लोग अब भी रेल मार्ग विस्तार की राह देख रहे हैं। लोगों ने कहा है कि सरगुजा को महानगरों से जोड़ने की जरूरत पिछले पचास साल से महसूस की जा रही है। पहले बरवाडीह-अंबिकापुर मार्ग को उपयुक्त माना था। आजादी से पहले इस मार्ग का आंशिक सर्वे और निर्माण भी हुआ था, लेकिन अब की सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक परिस्थितियां देख यह मार्ग लाभकारी नहीं है। कोल इंडिया व सरकारी दस्तावेजों से यह स्पष्ट है। इसके मुकाबले अंबिकापुर-रेणुकूट रेल मार्ग कम लागत, कम दूरी और अधिक लाभ वाला है। इसका सर्वे हो चुका है। डीपीआर भी जमा हो चुकी है, इसलिए इस परियोजना को मंजूरी देकर निर्माण कार्य शुरू करना चाहिए। छत्तीसगढ़ विधानसभा इस रेल मार्ग के पक्ष में एक साल पहले सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर चुकी है। यह जनभावना की वैधानिक अभिव्यक्ति है। इसे सम्मान देना लोकतंत्र की मूल भावना के अनुरूप होगा। यह मार्ग छत्तीसगढ़ को उत्तर प्रदेश, ओडिशा, मध्य प्रदेश और झारखंड से व्यापारिक, औद्योगिक और सांस्कृतिक रूप से जोड़ेगा। प्रयागराज, अयोध्या, वाराणसी और पुरी जैसे धार्मिक स्थलों से संपर्क बढ़ेगा। श्रीराम वन गमन मार्ग से भी जुड़ाव होगा। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। आम लोग बड़े पैमाने पर लाभान्वित होंगे। रायपुर और दुर्ग से बनारस और अयोध्या की दूरी करीब 200 किलोमीटर कम हो जाएगी। अंबिकापुर-रेणुकूट रेल मार्ग दिल्ली जाने उत्तर छत्तीसगढ़ का सबसे छोटा मार्ग बनेगा। रेणुकूट से अंबिकापुर तक की थी पदयात्रा इस रेल लाइन के लिए रेल संघर्ष समिति ने प्रस्तावित रेल रूट के रास्ते रेणुकूट से अंबिकापुर तक पिछले साल पदयात्रा निकाली थी। इस पदयात्रा का न केवल उत्तरप्रदेश के सोनभद्र जिले के लोगों का समर्थन मिला था, बल्कि सरगुजा संभाग के लोगों का भरपूर साथ मिला था। इस रेल लाइन में कोल इंडिया के कई कोल ब्लॉक हैं। जाहिर है इससे रेलवे को भी आर्थिक फायदा होगा, इसलिए आर्थिक रूप से ये रेललाइन काफी फायदेमंद है।


