रेशम केंद्र में उत्पादन से अधिक कर्मचारियों पर खर्च:बुरहानपुर में सिर्फ 8 क्विंटल रेशम उत्पादन, इससे ज्यादा कर्मचारियों की सैलरी, भवन पर करोड़ों खर्च

बुरहानपुर के शाहपुर रोड पर स्थित रेशम उद्योग अपनी उत्पादन क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पा रहा है। यहां कर्मचारियों के वेतन पर होने वाला खर्च उत्पादित रेशम के मूल्य से कहीं अधिक है। करोड़ों रुपए खर्च कर भवन तैयार किए गए थे, लेकिन सालाना उत्पादन मात्र सात से आठ क्विंटल रेशम का ही हो पा रहा है। इससे ज्यादा यहां पदस्थ कर्मचारियों की सैलरी है। 5.65 रुपए किलो में बिक रहा रेशम
स्थायी कर्मचारी राधेश्याम मालवीय के अनुसार, केंद्र में हर साल लगभग सात से आठ क्विंटल कोकून का उत्पादन होता है। हाल ही में इसे 565 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बेचा गया। स्थानीय स्तर पर खरीदार न मिलने के कारण, कर्मचारियों को कोकून बेचने के लिए मध्य प्रदेश के बाहर महाराष्ट्र के जालना जाना पड़ा, जिसमें आने-जाने का खर्च भी लगा। रेशम उत्पादन के बाद स्थानीय किसानों को इससे जोड़ने और प्रेरित करने की बात कही गई थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। वर्तमान में जिले के केवल दो किसान ही इस केंद्र से जुड़े हैं। रेशम उद्योग के पास 33 एकड़ का खेत भी है, जिसका अधिकांश हिस्सा खाली पड़ा है और इस ओर अधिकारियों का ध्यान नहीं है। केंद्र में एक अस्थायी और दो स्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पानी की कमी, प्रतिकूल मौसम, मजदूरों की अनुपलब्धता और हितग्राहियों की कमी के कारण सही उत्पादन नहीं हो पाता है। माल बेचने भी महाराष्ट्र जाना पड़ता है
ऑपरेटिव देवी सिंह राठौर ने बताया कि किसानों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। दो महीने पहले कलेक्टर हर्ष सिंह ने केंद्र का निरीक्षण कर सुधार के निर्देश दिए थे, लेकिन उत्पादन में कोई सुधार नहीं हुआ है। कर्नाटक की तर्ज पर यहां कोकून मंडी स्थापित करने की बात भी कही जा रही थी, लेकिन स्थिति यह है कि वर्तमान उत्पादन के लिए भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं और माल बेचने के लिए महाराष्ट्र ले जाना पड़ रहा है।

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