राजस्थान हाईकोर्ट ने पिछले 7 साल से अदालती आदेश की पालना नहीं करने पर रोडवेज एमडी और जयपुर डिपो के चीफ मैनेजर को 3 फरवरी को हाईकोर्ट में उपस्थित करने के लिए कहा हैं। यह आदेश जस्टिस सुदेश बंसल की अदालत ने फूलचंद गुर्जर की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। कोर्ट ने कहा है कि स्पष्ट अदालती आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता को नियमित नहीं करने पर आरएसआरटीसी के संबंधित अधिकारी, वर्तमान एमडी और जयपुर डिपो के चीफ मैनेजर भी अवमानना के दोषी प्रतीत होते है। कर्मचारी को करना था नियमित
दरअसल याचिकाकर्ता को आरएसआरटीसी की 31 मार्च,1995 की स्कीम के तहत नियमित करने का आदेश लेबर कोर्ट ने 20 फरवरी 1996 को पारित किया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने लेबर कोर्ट के आदेश को बहाल रखते हुए 12 सितंबर 2018 को याचिकाकर्ता को नियमित करने के आदेश दिए। हाईकोर्ट की खंडपीठ और सुप्रीम कोर्ट ने भी एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा। लेकिन उसके बाद भी रोडवेज ने याचिकाकर्ता को नियमित नहीं किया। रोडवेज का तर्क
रोडवेज ने अदालत में तर्क दिया कि उन्होने याचिकाकर्ता को लेबर कोर्ट के आदेश के बाद 14 मार्च 2001 को सेवा में पुन बहाल कर दिया था। लेकिन याचिकाकर्ता ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। ऐसे में रोडवेज ने 19 जनवरी 2024 के आदेश से याचिकाकर्ता को नियमित करने से इनकार किया हैं। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि हमारा आदेश स्पष्ट था कि कर्मचारी को 1995 की स्कीम के तहत नियमित किया जाए। लेकिन रोडवेज ने इस बात पर विचार नहीं किया कि क्या कर्मचारी लेबर कोर्ट के आदेश के अनुसार नियमितीकरण का पात्र है या नहीं।


