राष्ट्र और समाज के तौर पर सुरक्षा को महत्व देना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। स्टूडेंट्स ट्रैफिक नियमों की पूर्ण पालना करते हुए सड़क मार्गों पर सुरक्षित आवाजाही करें, ट्रैफिक में अनुशासित और सतर्क रहकर वे सुरक्षित तरीके से स्वयं भी अपने गंतव्य स्थल पहुंचे। आवागमन में अन्य चालकों और राहगीरों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखें, जिससे दूसरों को भी कोई असुविधा न हों और अवांछित दुर्घटनाओं से बचा जा सके। यह बात अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) ट्रैफिक एवं टी एंड टी अनिल पालीवाल ने शुक्रवार को जयपुर में मानसरोवर स्थित आईआईएस स्कूल में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह (1 से 31 जनवरी-2025) के सिलसिले में आयोजित अवेयरनेस कार्यक्रम में विद्यार्थियों और युवाओं को मोटिवेट करते हुए कहीं। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह ‘परवाह’ (केयर) की थीम पर आयोजित किया जा रहा है। एडीजी (ट्रैफिक) पालीवाल ने कहा- स्टूडेंट्स, युवा और आमजन सुरक्षित कार्य करने की आदत डालें। खुद भी सुरक्षित रहे, दूसरों को भी सुरक्षित रखें। इसके साथ ही यातायात में सभी की सुरक्षा का खयाल रखें। स्टूडेंट्स से गलत ड्राइविंग पर दूसरों को टोकने और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर सही जगह शिकायत करने के साथ ही सोसाइटी को हर तरह से सुरक्षित बनाने में योगदान की अपील की। एडीजी ने कहा कि आप जितने जागरूक सिटीजन बनेंगे, उतनी हमारी सेफ्टी बढे़गीं। इस दौरान इंटरेक्टिव सेशन में स्टूडेंट्स और स्कूल-कॉलेज बस ड्राइवरों के ग्रुप से बातचीत कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया और सुरक्षित यातायात के संबंध में उनके सुझावों को सराहा। कार्यक्रम में एडीजी पालीवाल और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने छात्र-छात्राओं को यातायात जागरूकता के संबंध में प्रचार सामग्री का वितरण किया। प्राचार्य नीति जोधा ने एडीजी पालीवाल और अन्य अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में एडिशनल डीसीपी यातायात रानू शर्मा, एडिशनल एसपी सुरेन्द्र सिंह, पुलिस निरीक्षक ब्रजेश कुमार सहित स्कूल के टीचर्स, स्टूडेंट्स, अभिभावकगण और गण्यमान्य नागरिक मौजूद रहें। इस दौरान ट्रैफिक पुलिसकर्मी प्रेम सिंह ने बच्चों को सड़क सुरक्षा संकेतकों, आदेशात्मक रोड साइनेजेज, सूचनात्मक चेतावनी, गति सीमा, अवरोधकों पर वाहन ठहराव, सड़क मार्ग एवं हाईवे विनियमन, रिफ्लेक्टर यूज, पार्किंग नियम, ओवरटेक एवं ट्रैफिक पुलिसकर्मी डिप्लोय न होने की दशा में भी यातायात निर्देश की पूर्ण पालना के बारे में विशेष प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जागरूक किया।


