रोपड़ में अंतरराज्यीय तेल चोरी गिरोह पकड़ा:डिजिटल लॉक से छेड़छाड़ कर पेट्रोल-डीजल चोरी, कंपनी कर्माचरियों से मिलीभगत की आशंका

पंजाब के रूपनगर जिले की पुलिस ने तकनीक का सहारा लेकर पेट्रोलियम उत्पादों की चोरी करने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह तेल टैंकरों के सुरक्षित ‘डिजिटल लॉक’ के साथ छेड़छाड़ कर पेट्रोल और डीजल चोरी करता था और उन्हें अवैध रूप से बाजार में बेच देता था। पुलिस ने इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक मास्टरमाइंड उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी देते हुए डीएसपी (डिटेक्टिव) जतिंदर चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह सफलता डीआईजी रूपनगर रेंज नानक सिंह और सीनियर पुलिस कप्तान (SSP) मनिंदर सिंह के कड़े निर्देशों के बाद मिली है। पुलिस को काफी समय से टैंकरों से तेल गायब होने की सूचनाएं मिल रही थीं। पकड़े गए आरोपियों में कई हाइटेक थे। ये माइक्रो प्रोसेसर व चिप के मामले में जानकार थे। जिससे आसानी से वे हाइटेक सुरक्षा का घेरा तोड़कर यह चोरी कर रहे थे। अभी तक जो सामने आया है उससे पुलिस को आशंका है कि इनके तार तेल कंपनियों के कुछ कर्मचारियों या तेल माफिया से जुड़े हो सकते हैं पुलिस की संयुक्त कार्रवाई और रणनीति इस गुत्थी को सुलझाने के लिए स्पेशल ब्रांच के टीम इंचार्ज इंस्पेक्टर गुरविंदर सिंह ढिल्लों और थाना सदर रोपड़ के प्रभारी इंस्पेक्टर सन्नी खन्ना के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर जाल बिछाया और इस संगठित नेटवर्क को ध्वस्त करने में कामयाबी हासिल की। पुलिस इसे संगठित अपराध और पेट्रोलियम तस्करी के खिलाफ एक बड़ी जीत मान रही है। आरोपियों की पहचान और आपराधिक इतिहास पुलिस ने थाना सदर रोपड़ में एफआईआर नंबर 08/2026 दर्ज की है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईपीसी की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है। चोरी का ‘हाई-टेक’ तरीका (Modus Operandi) जांच के दौरान जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आमतौर पर तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए कंपनियां डिजिटल लॉक और ओटीपी आधारित सिस्टम का उपयोग करती हैं, ताकि रास्ते में कोई छेड़छाड़ न हो सके। लेकिन यह गिरोह इस सुरक्षा चक्र को भी तोड़ चुका था। इस ग्रुप के सदस्य इस तकनीखि में माहिर थे। जिससे उस सुरक्षा चक्र को आसानी से तोड़ रहे थे। जानिए कितने हाइटेक थे चोर मोहम्मद दानिश इलेक्ट्रॉनिक चाबियां बनाने और माइक्रो प्रोसेसर चिप प्रोग्रामिंग में विशेषज्ञ है। वह टैंकरों के डिजिटल लॉक के कोड को डीकोड करके नकली मास्टर चाबियां तैयार करता था। विक्रम सिंह, जो खुद एक ड्राइवर था, इन चाबियों की मदद से सुनसान रास्तों या सड़क किनारे स्थित ढाबों पर टैंकर रोकता था। वहां बिना डिजिटल सील तोड़े, लॉक खोलकर पेट्रोल और डीजल निकाला जाता था। इस चोरी के तेल को स्थानीय ढाबों और छोटे व्यापारियों को सस्ते दामों पर अवैध रूप से बेच दिया जाता था। बरामदगी और भविष्य की जांच: पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में सामग्री बरामद की है, जिसमें शामिल हैं: तेल कंपनियों के कर्मचारियों से जुड़े हो सकते हैं तार डीएसपी जतिंदर चौहान ने स्पष्ट किया कि यह जांच का केवल शुरुआती चरण है। पुलिस को संदेह है कि इस गिरोह के तार तेल कंपनियों के कुछ अन्य कर्मचारियों या बड़े तेल डिपो के पास सक्रिय माफियाओं से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन्होंने अब तक कुल कितने लीटर तेल की चोरी की है और इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश और पंजाब के अन्य हिस्सों में छापेमारी कर और गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।

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