चित्तौड़गढ़ के गांव रोलाहेड़ा में 18 दिसंबर को हुई दर्दनाक घटना, जिसमें सांप के डसने के दौरान रील बनाते रहने से एक नाबालिग की मौत हो गई थी, का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। इस घटना को दैनिक भास्कर डिजिटल में 19 दिसंबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। खबर सामने आने के बाद वन विभाग की ओर से आमजन को अंधविश्वास से दूर रखने के लिए ठोस कदम उठाए गए। इसी क्रम में DFO राहुल झाझड़िया और DFO (वन्यजीव) मृदुला सिंह के निर्देशन में राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल, रोलहेड़ा में एक जन जागरूकता प्रोग्राम आयोजित किया गया। जनप्रतिनिधि, ग्रामीण और छात्र एक मंच पर हुए एकत्र इस जागरूकता प्रोग्राम में जनप्रतिनिधियों, ग्राम विकास अधिकारी, स्कूल स्टाफ, स्थानीय ग्रामीणों और बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य साफ था कि सांप से जुड़े अंधविश्वास, गलत परंपराएं और जानलेवा लापरवाही को रोका जाए। अधिकारियों ने ग्रामीणों और छात्रों को सरल भाषा में समझाया कि सांप काटने की स्थिति में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। प्रोग्राम के दौरान सभी से अपील की गई कि सोशल मीडिया के लिए रील बनाने या दिखावे के चक्कर में अपनी और दूसरों की जान खतरे में न डालें। राजस्थान में पाए जाने वाले सांपों की दी गई सरल जानकारी यशवंत कंवर, सहायक वन संरक्षक (मुख्यालय) चित्तौड़गढ़ के नेतृत्व में नेपाल सिंह, क्षेत्रीय वन अधिकारी उड़नदस्ता, अर्जुन कुमार, क्षेत्रीय वन अधिकारी मृगवन दूर्ग और मुकेश खारोल, सहायक वनपाल ने सांपों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान में जहरीले और बिना जहर के दोनों तरह के सांप पाए जाते हैं। जहरीले सांपों में मुख्य रूप से चार प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें किंग कोबरा, रसैल वाइपर, कॉमन करैत और सॉ स्केल्ड वाइपर शामिल हैं। इन सांपों की पहचान और उनके खतरे को समझना बेहद जरूरी है। सांप के जहर के प्रभाव शरीर पर क्या असर होता है कार्यक्रम में बताया गया कि अलग-अलग सांपों का जहर मानव शरीर पर अलग-अलग तरह से असर करता है। न्यूरोटॉक्सिक जहर से शरीर पैरालिसिस हो सकता है और सांस रुकने का खतरा रहता है। हिमोटॉक्सिन जहर खून की नलियों को नुकसान पहुंचाता है और रक्त के थक्के बनने की समस्या पैदा करता है। साइटोटॉक्सिक जहर शरीर के सेल्स को नष्ट करता है, जबकि प्रोटियोलिटिक जहर मांस और टिशू को नुकसान पहुंचाता है। अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि जहर का असर धीरे-धीरे जानलेवा बन सकता है, इसलिए समय पर इलाज सबसे जरूरी है। अंधविश्वास छोड़ें, सांप काटने पर सीधे हॉस्पिटल जाएं वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि सांप काटने की स्थिति में झाड़-फूंक, लोक देवताओं के स्थान पर ले जाना या देरी करना जानलेवा साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि सांप काटते ही पीड़ित को बिना समय गंवाए नजदीकी हॉस्पिटल पहुंचाना चाहिए। मोबाइल से वीडियो बनाना, रील बनाना या तमाशा देखना सबसे बड़ी गलती है। रोलाहेड़ा की घटना इसका ताजा उदाहरण है, जहां थोड़ी सी समझदारी एक मासूम की जान बचा सकती थी। सांप पकड़ना या छेड़छाड़ करना कानूनन गंभीर अपराध प्रोग्राम में यह भी स्पष्ट किया गया कि बिना अनुमति सांपों को पकड़ना, उनसे रील बनाना, जानबूझकर कटवाना या लोक देवताओं के स्थान पर ले जाना वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अपराध है। यह अपराध अनुसूची I से IV के अंतर्गत आता है, जिसमें 1 से 7 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। अधिकारियों ने कहा कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वन्य जीवों के साथ छेड़छाड़ न केवल गैरकानूनी है, बल्कि जीवन के लिए भी खतरा है। रेस्क्यू के लिए वन विभाग से संपर्क करने की अपील वन विभाग ने आमजन से अपील की कि यदि कहीं सांप या अन्य वन्य जीव दिखाई दें तो खुद कुछ करने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना दें। रेस्क्यू के लिए वनमंडल चित्तौड़गढ़ के हेल्पलाइन नंबर 01472-241049, 9829372995, 9460943014 और 9413437790 जारी किए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि प्रशिक्षित टीम मौके पर पहुंचकर सुरक्षित तरीके से सांप का रेस्क्यू करेगी। इस जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य यही है कि रोलाहेड़ा जैसी घटना दोबारा न हो और लोग अंधविश्वास छोड़कर समझदारी से काम लें।


