लंबे इंतजार के बाद खुशियों की रोशनी:दशकों का अंधेरा खत्म; पहली बार बिजली, पहली बार टीवी और पहली बार रोशनी के बीच गांव में उत्सव

ये पंक्तियां साल के अंतिम दिन बुधवार को घने जंगल से घिरे अनगड़ा प्रखंड के आदिवासी गांव कुदाझरिया में सच साबित हुई। क्योंकि, देश की आजादी के बाद पहली बार इस गांव में बिजली पहुंची। नव वर्ष 2026 की पूर्व संध्या पर बुधवार देर शाम सात बजे मैं ग्रामीणों के बीच खड़ा हूं। ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही है। क्योंकि, लंबे इंतजार के बाद आखिरकार वह सवेरा आया, जिसकी आस पीढ़ियों से लगाई जा रही थी। वह सवेरा, जो अंधकार को चीरकर सिर्फ रोशनी नहीं, बल्कि उम्मीद, आत्मविश्वास और नई ऊर्जा लेकर आया। आजादी के करीब 78 साल बाद जब गांव में बल्ब जले, तो यह पल इतिहास बन गया। पूरा गांव उत्सव में डूब गया। ढोल-मांदर की थाप गूंज उठी। महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे झूमते नजर आए। किसी की आंखों में खुशी के आंसू थे, तो किसी के चेहरे पर विश्वास कि अब गांव का भविष्य बदलेगा। क्योंकि, यह सिर्फ एक सरकारी योजना की सफलता नहीं, बल्कि अंधेरे से संघर्ष की जीत है। गांव के दिलेश्वर भोगता, फूलचंद भोगता, आशोमनी देवी, करमी देवी, रामकुमार गंझू, कुलेश्वर गंझू, मंशू गंझू, छटू गंझू ने कहा कि बिजली के अभाव में हमारा जीवन नर्क हो गया था। गांव में कोई शादी करने को तैयार नही होता था। हमारे पूर्वजों ने अपना पूरा जीवन लालटेन, ढिबरी और दीये की रोशनी में गुजारा। बारिश हो या ठंड, पढ़ाई से लेकर इलाज तक हर काम अंधेरे की चुनौती से जूझता रहा। कई पीढ़ियां इसी इंतजार में गुजर गईं कि कब गांव में बिजली आएगी। लेकिन आज लग रहा है कि आजादी सच में हमारे गांव तक पहुंची है। घने जंगल से घिरे मात्र 15 परिवार के इस गांव में बिजली आने के बाद पूरा दृश्य ही बदल गया है। पहाड़ पर बसा गांव, राजनीतिक पहल नहीं होने से लग गए इतने साल कुदाझरिया गांव की भौगोलिक बनावट काफी दुर्गम है। गांव पहाड़ पर बसा है। आवागमन का कोई जरिया नही है। पैदल ही गांव तक सिकिदरी मुख्य मार्ग से डेढ़ किमी की दूरी तय करके जाना होता है। बिजली ले जाने के लिए भी एक किमी पहले ही गंझू टोली में ट्रांसफार्मर लगाया गया। चारों तरफ पेड़-पौधे होने के कारण गांव तक 11 हजार वोल्ट तार जाना संभव नही था। इसलिए कवर केबल के माध्यम से गांव तक बिजली लाई गई। ग्रामीणों ने कहा कि गांव की भौगोलिक बनावट दुर्गम होने और राजनीतिक पहल कमजोर होने की वजह से इतने वर्ष बाद बिजली पहुंची। टीवी में दिखी दुनिया तो निहारते रह गए बच्चे रात के 8 बज रहे हैं। कुदाझरिया गांव में बिजली आने के बाद गांव के खलिहान में सभी ग्रामीण और बच्चे जुटे हैं। बच्चों को इंतजार है उस पल का जब वे पहली बार टीवी नामक वस्तु को देखेंगे। क्योंकि, जिला परिषद सदस्य राजेन्द्र शाही मुंडा और भोक्ता समाज के अगुआ पारस नाथ भोगता अपने बगल के गांव सिकिदरी से टीवी लाने गए हैं। रात 8.30 बजे जैसे ही टीवी पहुंचा, उस समय सबसे भावुक दृश्य दिखा। कई बच्चे खुशी से झूम उठे। बच्चों ने कहा कि अब तक उन्होंने सिर्फ सुना था कि टीवी में दुनिया दिखाई देती है। आज पहली बार यह दुनिया खुली आंखों से देख रहे हैं। जैसे ही स्क्रीन पर तस्वीरें उभरीं, बच्चे एकटक टीवी को देखने लगे।

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