अलवर के लक्ष्मणगढ़ कस्बे व आसपास के इलाकों में नदी-नालों पर बने अवैध अतिक्रमण, निर्माण और कब्जों की रिपोर्ट तैयार करने के लिए कलेक्टर ने तीन विभागों की संयुक्त कमेटी गठित कर दी है। नगर पालिका से जारी किए गए पट्टों की भी ये कमेटी गहन जांच करेगी। जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने पर सरकारी तंत्र से लेकर भूमाफियाओं तक पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। यह पूरा मामला सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार शर्मा द्वारा की गई शिकायत के बाद सामने आया। इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव जयपुर ने लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र में बांध की पाल, नदी, नाला, नहर, कुआं एवं सार्वजनिक भूमि पर हो रहे अतिक्रमणों की विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट कलेक्टर अलवर से तलब की थी। टीम का गठन कर मौके पर जांच के आदेश जारी किए मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद कलेक्टर अलवर आर्तिका शुक्ला ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राजस्व विभाग, जल संसाधन विभाग और सेटलमेंट विभाग की संयुक्त टीम का गठन कर मौके पर जांच के आदेश जारी किए। गठित टीम को जल स्रोतों के आसपास किए गए स्थाई एवं अस्थाई अतिक्रमणों की बारीकी से जांच कर मौका रिपोर्ट मय नक्शा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। स्थिति का भौतिक सत्यापन शुरू किया तहसीलदार हरदयाल सिंह ने बताया कि गठित टीम में राजेश कुमार (भू-अभिलेख निरीक्षक), विनीता कुमारी, भागीरथ मीणा, हेमराज मीणा एवं महेंद्र सिंह गुर्जर (पटवारी) शामिल हैं। टीम ने लक्ष्मणगढ़ पहुंचकर बांध की पाल की चौड़ाई-लंबाई, जल निकासी व्यवस्था और आसपास के नालों की स्थिति का भौतिक सत्यापन शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि जल निकासी क्षेत्रों का सीमाज्ञान ETS या DGPS मशीन से कर सटीक पैमाइश की जाएगी। पुराने रिकॉर्ड खंगालकर यह भी जांच होगी कि बांध की पाल की पूर्व में चौड़ाई और लंबाई कितनी थी। वर्तमान में कितनी रह गई है। जांच टीम द्वारा नगर पालिका से जारी किए गए पट्टों की वैधता भी परखी जाएगी। यह देखा जाएगा कि कहीं जल स्रोतों और सार्वजनिक भूमि पर पट्टे जारी कर अवैध कब्जों को वैध तो नहीं बनाया गया। रिपोर्ट में दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और भूमाफियाओं के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। (इनपुट: प्रिंस पाराशर)


