इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में 2018 में कासगंज में एक तिरंगा यात्रा के दौरान हुए चंदन हत्याकांड मामले में अभियुक्त की ओर से याचिका दाखिल की गई थी। इसके द्वारा एनआईए कोर्ट में चल रहे ट्रायल को रोकने के लिए याचिका दाखिल किया गया था। इसे न्यायालय ने सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। इससे पहले हुई सुनवाई में न्यायालय ने ट्रायल पर अंतरिम रोक लगाई थी। अब याचिका के खारिज होने के बाद ट्रायल की कार्यवाही आगे बढ़ेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने अभियुक्त नसीम जावेद की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के पश्चात पारित किया है। याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र मिश्रा ने न्यायालय को बताया कि राजद्रोह से संबंधित आईपीसी की धारा 124 ए के तहत आरोप तय किए जाने पर उच्चतम न्यायालय ने एसजी वोम्बटकेरे मामले में दिए अपने फैसले के तहत रोक लगा चुकी है। उच्चतम न्यायालय ने इसी आदेश में यह भी कहा है कि जिन मामलों में 124 ए के तहत आरोप तय कर दिए गए हैं, उन पर भी रोक रहेगी। याची के अधिवक्ता ने न्यायालय को यह भी बताया कि उच्चतम न्यायालय के इस आदेश के बावजूद भी वर्तमान मामले में 124 ए के तहत भी ट्रायल चल रहा है तथा अंतिम सुनवाई होने जा रही है। इसी के साथ ही न्यायालय को यह भी बताया कि स्वयं राज्य सरकार की अधिसूचना के तहत एनआईए एक्ट के तहत तीसरे सबसे वरिष्ठ अपर सत्र न्यायाधीश के समक्ष ही मुकदमा चलाया जा सकता है, जबकि वर्तमान ट्रायल जिस अपर सत्र न्यायाधीश के समक्ष चलाया जा रहा है, वह वरिष्ठता क्रमांक में छठे नंबर पर हैं। न्यायालय ने अपने विस्तृत निर्णय में कहा कि वोम्बटकेरे मामले में शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि 124ए के साथ-साथ यदि अन्य प्रावधानों के तहत ट्रायल चल रहा है, तो यह चलता रहेगा, हालांकि 124ए में ट्रायल की कार्यवाही नहीं होगी। विचारण न्यायाधीश की वरिष्ठता के संबंध में न्यायालय ने पाया कि वर्तमान ट्रायल जिस अपर सत्र न्यायाधीश के यहां चल रहा है, वह वरिष्ठता क्रम में छठे स्थान पर तो हैं, लेकिन उनसे वरिष्ठ दूसरे न्यायाधीश अलग-अलग अदालतों के विशेष न्यायाधीश हैं। इस प्रकार उन्हें गणना से अलग कर देने पर वर्तमान विचारण न्यायाधीश वरिष्ठता में तीसरे क्रमान पर ही आते हैं।


