युवाओं के बेहतर भविष्य और खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गांव लमोचड़ खुर्द में स्वीकृत हुआ खेल स्टेडियम विवादों के घेरे में आ गया है। गांव की पंचायत और एक स्थानीय भू-स्वामी के बीच चल रही कानूनी लड़ाई के बीच प्रशासन द्वारा दोबारा की गई निशानदेही ने तनाव और बढ़ा दिया है। मामला उस समय और पेचीदा हो गया जब शिकायतकर्ता पक्ष ने प्रशासनिक टीम द्वारा तैयार की गई निशानदेही रिपोर्ट को मानने से इनकार करते हुए उस पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। सरपंच के पुत्र संदीप कुमार का कहना है कि पंचायत ने युवाओं के खेलने के लिए सरकार से स्टेडियम की मांग की थी, जिसके लिए पंचायत की चार एकड़ जमीन आवंटित है। उन्होंने आरोप लगाया कि पास की जमीन के मालिक करनैल सिंह ने अड़ंगा डालते हुए काम रुकवा दिया है। संदीप कुमार के अनुसार, यह किसी का निजी प्रोजेक्ट नहीं है बल्कि पूरे गांव के नौजवानों के हित के लिए है, जिसकी निशानदेही पहले भी हो चुकी है और अब अधिकारियों की मौजूदगी में दोबारा प्रक्रिया पूरी की गई है। वहीं दूसरी ओर, करनैल सिंह का पक्ष बिल्कुल स्पष्ट है। उनका कहना है कि भूमि विवाद को लेकर उन्होंने पहले ही माननीय न्यायालय में केस दायर किया हुआ है। जब तक कोर्ट का कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक इस तरह की कोई भी प्रशासनिक कार्रवाई सही नहीं है। इसी विरोध के चलते उन्होंने निशानदेही की रिपोर्ट पर अपने हस्ताक्षर नहीं किए। निशानदेही करने पहुंचे कानूनगो गौतम कंबोज ने बताया कि उन्हें एसडीओ (पंचायती राज) फाजिल्का द्वारा लिखित निर्देश प्राप्त हुए थे। इन आदेशों के पालन में बीडीपीओ विभाग के अधिकारियों और दोनों पक्षों की मौजूदगी में जमीन की पैमाइश का काम मुकम्मल कर लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए रिपोर्ट तैयार कर ली है, हालांकि एक पक्ष का उस पर असहमत होना अब इस विवाद को और लंबा खींच सकता है। अब सबकी नजरें अदालत के आने वाले फैसले पर टिकी हैं कि क्या लमोचड़ खुर्द के युवाओं को उनका खेल का मैदान मिल पाएगा या यह मामला फाइलों और तारीखों में ही उलझ कर रह जाएगा।


