लाइब्रेरियन सेवा अवधि मामले में हाईकोर्ट के आदेश का हवाला:चंडीगढ़ CAT में अगली सुनवाई 10 फरवरी, सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी

सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट), चंडीगढ़ बेंच ने लाइब्रेरियन की सेवानिवृत्ति आयु को लेकर चल रहे मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के हालिया आदेश का संज्ञान लिया है। यह मामला सीनियर सिटीजन साधना भारद्वाज बनाम प्रेरणा पुरी व अन्य से जुड़ा है। कैट की बेंच में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में दायर सिविल रिट याचिका के 8 जनवरी 2026 के आदेश को रिकॉर्ड पर रखा गया। हाईकोर्ट ने उक्त मामले में नोटिस ऑफ मोशन जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि एआईसीटीई और यूजीसी के निर्देशों के अनुसार लाइब्रेरियन को शिक्षण कैडर का हिस्सा माना गया है। समान मामले का दिया गया हवाला हाईकोर्ट के आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि इसी तरह के एक अन्य मामले में लाइब्रेरियन रेणु ओबेरॉय को 60 की बजाय 62 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी गई थी। इस संबंध में दायर रिट याचिका को पहले ही हाईकोर्ट खारिज कर चुका है। कोर्ट ने माना कि समान परिस्थितियों में लाभ दिए जाने के बाद वर्तमान मामले में प्रथम दृष्टया आदेश पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता। हाईकोर्ट ने साफ किया कि साधना भारद्वाज की नौकरी में लगातार सेवा का फैसला रिट याचिका के अंतिम आदेश पर निर्भर रहेगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि 60 साल की उम्र के बाद की अवधि के लिए कोई बकाया (एरियर) नहीं मिलेगा, और उनकी दोबारा जॉइनिंग सिर्फ आगे के समय के लिए मानी जाएगी, पिछली तारीख से नहीं। सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कैट में सुनवाई के दौरान प्रशासन ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन हाईकोर्ट के 8 जनवरी 2026 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने की प्रक्रिया चल रही है। कैट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 फरवरी 2026 की तारीख तय की है। साथ ही प्रशासन को आदेश दिया गया कि वह अगली सुनवाई की तारीख तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करे। इस मामले की सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल की बेंच में सदस्य (प्रशासनिक) अंजली भावरा और सदस्य (न्यायिक) रमेश सिंह ठाकुर मौजूद रहे।

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