राजगढ़ में खिलचीपुर का बिसलाई गांव। यहां सड़क किनारे एक घर के बाहर दो सहेलियों पैरों में चांदी के कड़े पहने बैठी हैं। इनमें से एक है 14 वर्षीय मुस्कान (बदला हुआ नाम)। मुस्कान की सगाई हो चुकी है तो सहेली का बाल विवाह। दोनों को सगाई या शादी का मतलब नहीं पता, लेकिन पांव के कड़ों से समझ जाती हैं कि उनकी आजादी छीनी जा चुकी है। दोनों की पांचवीं के बाद पढ़ाई भी छूट गई है। राजगढ़ के 50 गांव के 700 से ज्यादा बच्चों के साथ हो रहा है। महिला बाल विकास विभाग के लिए अहिंसा वेलफेयर सोसायटी ने कुप्रथा वाले गांव और बच्चे चिह्नित किए। इन बच्चों की उम्र एक साल से 10 वर्ष के बीच है। इनकी या तो सगाई हो गई है या बाल विवाह। भास्कर ने बख्तावरपुरा, धनवासकलां, पुरा खजला, बोरकापानी के सरकारी व निजी स्कूल में पड़ताल की। बच्चों ने खुद हाथ उठाकर बताया कि उनकी सगाई हो चुकी। चार स्कूलों में 32 बेटे-बेटियों की सगाई हो चुकी, 3 का विवाह हो चुका। भास्कर रिपोर्टर गांव में पहुंचा तो लोगों ने घेरा, यहां हर दूसरे बच्चे की बाल सगाई राजगढ़ में 622 ग्राम पंचायतें हैं। ज्यादातर पंचायतों के गांवों में बाल सगाई-विवाह करने की कुप्रथा है। अहिंसा वेलफेयर सोसायटी ने पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर 50 गांव चिह्नित किए हैं। इनमें सरेड़ी (अब सरेड़ी जिले का पहला बाल मित्र गांव है), खारचाखेड़ी, तलाईखेड़ा, हताईखेड़ा, चांदपुरा, बरखेड़ा, मोतीपुरा सौंधिया, नानागांव, राजपुरा, नेसड़ी, गोरधनपुरा, कुंडीबे, मोकमपुरा, फूलखेड़ी, मनोहरपुरा, ज्वालापुरा, मालीपुरा, काशी रावतपुरा, कालीपीठ, जूनापानी, झाझंड़पुर, कालीखेड़ा, मोतीपुरा, कांसी, जमशेरपुरा, परसपुरा, पुरा खजला, धनवासकलां, पड़िया, बादिया, रामपुरिया, बोरकापानी, हमीरपुरा, हरिपुरा नजदीक, बख्तावरपुरा आदि हैं। बाल सगाई और बाल विवाह के दंश में फंसे बच्चों का दर्द सामने लाने भास्कर रिपोर्टर उन गांवों तक गया, जहां जाने से सरकारी अफसर भी घबराते हैं। बलुआ पत्थरों वाले दुर्गपुरा गांव में प्रवेश करते ही लोग घूरने लगे। घेरा सा बनाते हुए लोगों ने गांव आने का कारण पूछा। उन्हें बताया गया कि बच्चों को जागरूक करने और आंगनबाड़ी केंद्र की हकीकत जानने आए हैं। तब ये लोग बातचीत के लिए तैयार हुए। दुर्गपुरा की तरह उदियापुरा, मोतीपुरा, पुरा खजला, बख्तावरपुरा गांव के हालात नजर आए। 4 स्कूलों में हाथ उठाकर 32 बच्चे बोले- हमारी सगाई हो चुकी, 3 का बाल विवाह बेटी इंदौर में नौकरी करने लगी, पता चला 4 साल की उम्र में शादी हो चुकी
करनवास के भाटखेड़ी गांव में रहने वाली बेटी का 4 साल की उम्र में बाल विवाह कर दिया गया। बेटी बालिग हुई। इंदौर में नौकरी करने लगी। वर पक्ष विदा कराने आए तो मालूम हुआ विवाह हो चुका। बेटी डर से 6 माह इंदौर से घर नहीं आ सकी। ब्यावरा एसडीओपी से शिकायत कर बाल विवाह से छुटकारा मिला। दो साल की उम्र में सगाई, पैरों में कड़े पहनकर स्कूल जाती है बच्ची
6 वर्षीय अनीता (परिवर्तित नाम) कक्षा एक में पढ़ती है। दो साल की उम्र में बाल सगाई कर उसे पैरों में चांदी के कड़े पहना दिए। जागरूकता कार्यक्रम में अनीता ने अहिंसा वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों को जानकारी दी। इसके बाद परिजन से वचनपत्र भरवाया गया कि 18 की उम्र से पहले शादी नहीं कराएंगे। बाल विवाह खत्म करने के लिए ससुराल वाले मांग रहे 8 लाख रुपए
राजगढ़ मुख्यालय से 10 किमी दूर रायगढ़ में सुनीता (परिवर्तित नाम) का बाल विवाह हो गया। कुछ समय बाद ससुराल वालों ने सुनीता को घर से निकाल दिया। अब वेे 8 लाख रुपए मांग रहे हैं। मामला पंचायत में पहु़ंचा तो पंचायत ने भी 8 लाख देने के लिए कह दिया। माता-पिता मजदूरी कर ये रकम जोड़ रहे हैं। बाल विवाह अपराध पर पर्दा डालने के लिए बाल सगाई… राजगढ़ राजस्थान बॉर्डर से लगा है। यहां जन्म लेते ही बेटे-बेटियों का रिश्ता तय कर देते हैं। बाल विवाह अपराध से बचने के लिए यहां 1 से 2 साल की उम्र में बच्चों की सगाई कर दी जाती है। इस कुप्रथा में फंसे बच्चों की पढ़ाई भी छूट चुकी है। अहिंसा वेलफेयर सोसायटी, राजगढ़ के अरुण सातलकर बोले कि जिन बच्चों को चिह्नित किया गया है, उनके माता-पिता से बाल विवाह न कराने का संकल्प पत्र ले रहे हैं। जो बच्चे चिह्नित किए, उनकी निगरानी करेंगे ताकि बाल विवाह नहीं हो सके
अहिंसा वेलफेयर सोसायटी ने 50 गांवों में जो बच्चे चिह्नित किए हैं, उनकी भी निगरानी की जाएगी, ताकि उनका बाल विवाह न हो। पुलिस और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी चिन्हित बच्चों की सूची देंगे। इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए अभियान चलाएंगे। -डॉ गिरीश मिश्रा, कलेक्टर, राजगढ़ माता-पिता को जागरूक करेंगे
हम भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से सर्वे करवा रहे हैं। अहिंसा वेलफेयर सोसायटी ने जो बच्चे चिह्नित किए हैं, उनके माता-पिता को जागरूक करेंगे, ताकि वे सगाई वापस कर दें।-श्यामबाबू खरे, जिला महिला सशक्तीकरण अधिकारी


