भास्कर संवाददाता | सीकर सेना की ड्यूटी पर तैनात एक जवान के अचानक लापता हो जाने से वर्षों तक जिस परिवार ने अनिश्चितता, आर्थिक तंगी और प्रशासनिक उलझनों का सामना किया, आखिरकार उसे न्याय मिला। नेतड़वास निवासी लापता सैनिक रामकुमार सिंह की पत्नी मंजू देवी को 9 साल बाद एरियर व सेवानिवृत्ति पर मिलने वाले लाभ के साथ पेंशन स्वीकृत की गई है। सैनिक कल्याण बोर्ड से कल्याण संगठक साबूलाल चौधरी ने बताया कि लापता सैनिक को मृत मानकर पत्नी के खाते में एरियर व सेवानिवृत्ति पर मिलने वाले लाभ के साथ एक मुश्त 33 लाख 74 हजार रुपए जमा हो चुके हैं। अब हर महीने 29500 रुपए पेंशन के भी मिलेंगे। जानकारी के अनुसार सैनिक रामकुमार सिंह 3 नवंबर 2016 को जयपुर में आर्मी ड्यूटी पर थे। उसी दौरान वे अचानक लापता हो गए। इतने वर्षों तक न तो सेना की ओर से उनकी गुमशुदगी का ठोस कारण सामने आ पाया और न ही उनका कोई सुराग मिल सका। सैनिक के घर नहीं लौटने से परिवार पर मानो विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा। पिता सुल्तान सिंह ढाका ने बताया कि बेटे के अचानक गायब होने से परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति बुरी तरह प्रभावित हुई। उन्होंने बेटे की यूनिट से लगातार संपर्क किया, लेकिन कहीं से भी कोई ठोस जवाब नहीं मिला।आखिरकार लंबे इंतजार का फल मिला। मंजू देवी को 3 नवंबर 2016 से पेंशन स्वीकृत कर दी गई और 9 वर्षों का एरियर का भुगतान कर दिया गया। मंजू देवी ने जिला सैनिक कल्याण कार्यालय सीकर का आभार जताया। सैनिक कल्याण कार्यालय की इस पहल ने उन परिवारों के लिए भी उम्मीद की किरण जगाई है, जो किसी न किसी कारण से अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। परिवार की पीड़ा उस समय और बढ़ गई, जब वर्षों तक पेंशन जैसे वैधानिक अधिकार के लिए भी भटकना पड़ा। बीते वर्ष सुल्तान सिंह ने अपनी व्यथा नेतड़वास निवासी हवलदार रणजीत सिंह ढाका को बताई, जो जिला सैनिक कल्याण विभाग सीकर में संविदा पर कार्यरत हैं। इसके बाद मामला तेजी से आगे बढ़ा। हवलदार ढाका ने अगले ही दिन परिवार को सैनिक कल्याण बोर्ड बुलवाया और जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल ब्रिजेंद्र सिंह महला से मुलाकात करवाई। कर्नल महला ने पूरे मामले को गंभीरता से सुना व नियमों के तहत मंजू देवी से पेंशन के लिए आवेदन करवाया। चूंकि ये प्रकरण सामान्य नहीं बल्कि अलग प्रकृति का था, इसलिए उन्होंने सेना के संबंधित अधिकारियों से लगातार समन्वय स्थापित किया। पेंशन स्वीकृति की हर प्रक्रिया पर नजर रखी। आवश्यक दस्तावेज जुटाए और फाइल को लंबित न रहने देने के लिए निरंतर फॉलोअप किया गया।


