लापरवाही:ईको पार्क में 5 लाख के एमफी थिएटर में लाल पटिए, 3.20 लाख के टॉयलेट बेंबू पर झाड़ियां

मध्यप्रदेश ईको टूरिज्म बोर्ड से 38.25 लाख रुपए लेकर पथरिया जाट में बनाए ईको पार्क में इतने घटिया काम कराए कि यह 6 साल भी नहीं चले हैं। 2017-18 में तत्कालीन डीएफओ क्षितिज कुमार के कार्यकाल में तैयार इस पार्क में 5 लाख से बने एमफी थिएटर में बस रंगीन पटिए हैं। 3.20 लाख के टॉयलेट बेंबू पर झाड़ियां उगी हैं। इसके प्रचार प्रसार पर ही एक लाख खर्च बताया है, लेकिन इसका बोर्ड तक देखने को नहीं मिलता है। पार्क जाने के लिए गांव में पूछने पर इसकी जानकारी मिलती है। इको पार्क ढूंढकर पहुंच भी जाएं तो यहां सिवाय घासफूस के अलावा कुछ नहीं है। बच्चों के मनोरंजन के लिए चिल्ड्रन पार्क सहित एडवेंचर एक्टिविटी के लिए उपकरण खरीदी पर 7 लाख रुपए खर्च किए हैं। पर बच्चों के लिए कुछ झूलों के अलावा कुछ नहीं हैं। पार्क बनाने के लिए 2017-18 में 38.25 लाख रुपए खर्च किए गए। इसे तामझाम के साथ शुरू भी किया करीब छह महीने तक चलाया गया। 2019 में समिति में विवाद होने के बाद वन विभाग चलाता रहा लेकिन रखरखाव नहीं हुआ। इस कारण अब यहां न तो पेगोड़ा नजर आते हैं और न ही बच्चों के मनोरंजन के लिए खरीदे उपकरण हैं। मंकी कॉल, स्काई वाक टूटे पड़े हैं। इन उपकरण पर 7 लाख खर्च किए गए थे। पार्क के ज्यादातर काम खराब हो जाने के बाद अब 8.92 लाख रुपए से मरम्मत कराई जा रही है। तत्कालीन डीएफओ क्षितिज कुमार अब इस संबंध में कुछ भी नहीं कहना चाहते हैं। सागर रैंजर रवि सिंह ने बताया कि वहां काम पहले हुए थे। अब फिर उनकी मरम्मत कराई जा रही है। एमफी थिएटर बनवाया गया था। अब कुछ नए काम भी कराए जा रहे हैं। 8.92 लाख से फिर ये कराए जा रहे काम ट्री हाउस मरम्मत 50 हजार, मंकी कॉल मरम्मत कार्य 15 हजार, स्काईवाक 15 हजार, पार्क एवं तालाब मे फेंसिंग निर्माण 2.50 लाख, टिकट काउंटर मरम्मत 30 हजार, कैंटीन रिपेयरिंग 1.50 लाख, बाथरूम रिपेयरिंग 50 हजार, सिट आउट निर्माण 35 हजार, पैगोड़ा रिपेयरिंग 25 हजार, एमफी थिएटर मरम्मत 75 हजार, साइकिल ट्रैक निर्माण 50 हजार, ट्रेम पोलिन 50 हजार, गैस कनेक्शन 7 हजार अन्य व्यय 90 हजार रुपए। निजी एजेंसी को दिया था चलाने ईको पार्क 2017 में बनवाया गया था। पहले 29.25 लाख के काम कराए। इसके बाद 9 लाख रुपए खर्च किए। 2018 तक कुल 38.25 लाख खर्च किए गए। इसके बाद निजी एजेंसी को चलाने के लिए दिया गया। कुछ साल तक तो चलता रहा। रखरखाव नहीं होने के कारण यह खराब होता चला गया। अब यहां केवल पेड़ व झाड़ियां ही नजर आ रही हैं। ईको पार्क में इन कामों पर 38.25 लाख रुपए खर्च कैफिट एरिया-1.18 लाख, नेचर ट्रेल 29 हजार, गेट निर्माण 1.15 लाख, पेगोड़ा मर‌म्मत 74 हजार, हट मरम्मत 19 हजार, टिकट विंडो 87 हजार, टॉयलेट निर्माण 3.38 लाख, टॉयलेट बेंबूवर्क 3.20 लाख, पेयजल व्यवस्था 92 हजार, पार्किंग 10 हजार, रोड मरम्मत व सौंदर्यीकरण 4.84 लाख, बायना कूलर व कैमरा 50 हजार, प्रचार प्रसार 1 लाख, समिति प्रशिक्षण 50 हजार, स्टेडियम एमफी थिएटर 5.03 लाख, चेक पोस्ट निर्माण 59 लाख, मनोरंजन सामग्री 7 लाख, पौधरोपण 5.64 लाख, तालाब मरम्मत 25 हजार, आकस्मिक व्यय 88 हजार रुपए।

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