लालपुर की जूतियां:6 राज्यों में हो रही सप्लाई, कुटीर उद्योग पनपा; 15 दिन पहले ही करानी पड़ती है बुकिंग

भरतपुर जिले के नदबई में छोठा सा गांव लालपुर, जो अपने हुनर के लिए न केवल प्रदेश में बल्कि हरियाणा-पंजाब व उत्तरप्रदेश सहित देश के कई राज्यों में चमड़े की जूती के लिए जाना जाता है। लालपुर में बनी चमड़े की जूती ही इस गांव की मुख्य पहचान है। लालपुर में बनी जूतियों की प्रदेश के समीपवर्ती जिलें सहित कई राज्यों में इतनी डिमांड है कि, जूती बनाने के लिए करीब 15 से 20 दिन पहले ही बुकिंग कराना पड़ता है। लालपुर में करीब 60 से 70 परिवार है, जो कि चमड़े से बनी जूती बनाने का व्यवसाय करते। लेकिन, खास बात है कि आज के मशीनी युग में भी हाथ से ही जूती बना रहे। कारीगरों की मानें तो लालपुर में बनीं चमड़े की जूती की राजस्थान सहित पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, मुंबई व गुजरात तक डिमांड की जाती। लालपुर में करीब 150 साल से जूती बनाने का काम चल रहा। कारीगर बलवीर जाटव की मानें तो पांच पीढ़ी से चमड़े की जूती बना रहे। आगरा से चमड़ा लेकर आते, बाद में हाथ से ही चमड़े की जूती बनाते। मजबूती के चलते ही, लालपुर में बनी जूतियों की डिमांड इतनी है कि, लोगों को 15 से 20 दिन पहले ही नाप देकर एडवांस बुकिंग करना पड़ता। कई परिवार देश के अलग-अलग राज्यों के ठेकेदार से बुकिंग करते और बिक्री करने के लिए उन राज्यों में ले जाते। उधर, कारीगर बल्ला जाटव ने उच्च क्वालिटी का चमड़ा उपयोग में लेने व हाथ से जूती बनाने पर मजबूती होने के चलते डिमांड अधिक होने के बारे में बताया। कारीगर मिथुन जाटव ने बताया कि, जूती निर्माण में उच्च क्वालिटी का चमड़ा व हाथ से सिलाई की जाती।
हाथ से जूती बनाने के चलते, कारीगर एक दिन में सिर्फ एक जोडी ही जूती बनाता। एक जोडी जूती की कीमत करीब एक हजार रुपए होने के चलते कारीगर का जीवन-यापन हो जाता। लेकिन, जूती व्यवसाय में कारीगर को आर्थिक सहयोग नही मिलने से गरीबी में ही जीवन जीना मजबूरी हो रहा। विश्वेन्द्र सिंह ने बताया कि, गांव को पहचान दिला रहे जूती व्यवसाय को लेकर, सरकार को भी ध्यान देना होगा। पीएम विश्वकर्मा सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित करते हुए कारीगरों की हौसला-अफजाई करने पर ही लालपुर की पहचान बन रहे चमड़ा जूती व्यवसाय को बढ़ावा मिल सकता है। पंचायत का लेखा-जोखा जनसंख्या – 3000
साक्षरता दर – 80%
जिला मुख्यालय से दूरी – 45 किमी
कनेक्टिविटी – सड़क से जुड़ा है
पहचान – जूती व्यवसाय
प्रमुख उत्पादन – गेहूं, सरसों
आय का प्रमुख स्रोत – कृषि, पशुपालन

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