लुधियाना-जालंधर में देश की आजादी के सूत्रधार रहे महात्मा गांधी बापू की अनदेखी की गई। लुधियाना-जालंधर के बॉर्डर पर सतलुज किनारे महात्मा गांधी का एक 77 साल पुराना स्मारक बना है। गांधी जयंती पर उस स्मारक पर लुधियाना व जालंधर से कोई नेता या प्रशासनिक अधिकारी बापू के स्मारक पर नहीं पहुंचा।
30 जनवरी 1948 को बापू की मौत के बाद 12 फरवरी 1948 को सतलुज के किनारे इसी स्थान पर बापू की अस्थियां सतलुज में प्रवाहित की गई थी। उसके बाद यहां पर बापू का एक स्मारक बनाया गया। उस समय की सरकार ने स्मारक तो बना दिया लेकिन अब न तो सरकारें उस स्मारक की सुध ले रही हैं और न ही उनको अपना पूर्वज मानने वाले राजनीतिक दल। गांधी जयंती पर सिर्फ एक व्यक्ति ने दी श्रद्धांजलि
गांधी स्मारक के नजदीक रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि सुबह के समय फिल्लौर से एक व्यक्ति आया और उसने ही यहां पर साफ सफाई करवाई। उस व्यक्ति ने ही स्मारक पर फूल मालाएं अर्पित की। उसके अलावा कोई भी व्यक्ति गांधी के स्मारक पर नहीं आया।
गोबर से भरा रहता है गांधी स्मारक का प्रांगण
प्रशासनिक स्तर पर गांधी स्मारक पूरी तरह से अनदेखा है। आम दिनों में गांधी स्मारक के प्रांगण में गोबर ही गोबर होता है। गांधी जयंती के मौके पर फिल्लौर के एक व्यक्ति ने प्रांगण की सफाई करवाई है। दरअसल गांधी स्मारक के साथ झुग्गियां हैं और उनके पशु इसी प्रांगण में घूमते रहते हैं। महात्मा गांधी की इच्छा पर हुई थी यहां अस्थियां प्रवाहित
महात्मा गांधी ने अपनी मृत्यु से पूर्व ही इच्छा जाहिर की थी कि उनकी मौत के बाद उनकी अस्थितयां देश की अलग-अलग नदियों में प्रवाहित की जाएं। उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए अन्य नदियों के साथ साथ सतलुज में भी अस्थियां प्रवाहित की गई। सतलुज में फिल्लौर की तरफ से अस्थियां 12 फरवरी 1948 को अस्थियां प्रवाहित की गई। स्मारक पर लिखे गए हैं गांधी जी के 11 सूत्र
स्मारक पर गांधी जी के 11 सूत्र लिखे गए हैं। गांधी जी के सूत्र हिंदी और पंजाबी दोनों भाषाओं में लिखे गए हैं। सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अस्वाद, अस्तेय, अपरिग्रह, निडरता, छुआछूत का निवारण, शारीरिक श्रम,सर्वधर्म समभाव और स्वदेशी ये 11 वाक्य गांधी जी के सूत्र थे। लुधियाना-जालंधर में सांसद भी कांग्रेस के हैं
महात्मा गांधी वैसे किसी पार्टी विशेष के नहीं हैं लेकिन कांग्रेस पार्टी उन पर अपना दावा करती है। लुधियाना व जालंधर में सांसद कांग्रेस पार्टी के हैं उसके बावजूद दोनों में से कोई भी इस स्मारक पर गांधी जायंती के दिन दो फूल चढ़ाने तक नहीं गए। लुधियाना जिला कांग्रेस से भी कोई नेता गांधी जी के समाधी स्थल पर नहीं पहुंचा। नगर निगम के बाहर लगी प्रतिमा भी करती रही इंतजार
लुधियाना नगर निगम मुख्यालय मातारानी चौक में भी महात्मा गांधी की प्रतिमा लगाई गई है। वहां पर नगर निगम के कुछ अफसरों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा को एक हार चढ़ाया है। यहां पर भी स्थानीय नेताओं ने गांधी जी को उनकी जयंती पर पुष्प अर्पित करने जरूरत नहीं समझी। यहां पर तो गांधी जी की प्रतिमा के नीचे लोगों ने अपना डेरा बनाया हुआ है।


